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धन से बड़े हैं मन के मकसद

स्टीव ‘वोज’ (स्टीफन गेरी वोज्निअक) कॉलेज ड्रॉपआउट हैं, लेकिन उनके पास अमेरिका के नौ विश्वविद्यालयों की मानद पीएचडी उपाधियां हैं। उन्होंने स्टीव जॉब्स के साथ ऐपल की स्थापना की थी। ऐपल का लोगो डिजाइन वास्तव में वोज की देन है। ऐपल कंप्यूटर लांच करने के लिए जॉब्स ने अपनी फॉक्सवैगन गाड़ी और वोज ने अपना साइंटिफिक कैलकुलेटर बेचकर 1350 डॉलर इकट्ठे किए थे। फिर वोज के घर पर ही तैयार हुआ था, उनका पहला कंप्यूटर।

वोज 18 साल की उम्र में पहली बार स्टीव जॉब्स से मिले थे, तब जॉब्स केवल 13 साल के थे। दोनों की दिलचस्पी कंप्यूटर्स में थी और दोनों ही कुछ खास करना चाहते थे। कुछ  मुलाकातों के बाद दोनों ने 25 डॉलर में एक माइक्रोप्रोसेसर खरीदा व पर्सनल कंप्यूटर बनाने की कोशिशें शुरू कीं। इस कोशिश में उन्होंने एक ‘ब्लू बॉक्स’ बना डाला, जिससे वे ‘टोल फ्री’ टेलीफोन कॉल्स करने लगे थे। वोज के शब्दों में, ‘यह थी ऐपल कंपनी की शुरुआत। अगर यह ब्लू बॉक्स नहीं होता, तो ऐपल कंप्यूटर नहीं होता।’

वैसे वोज इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। पिछले दिनों वोज ने अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन-दर्शन को बताया। इस भाषण में जानने और सीखने के लिए बहुत कुछ है।

लक्ष्य केवल धन कमाना नहीं
वोज चाहते, तो उनकी गिनती दुनिया के सबसे धनी लोगों में हो सकती थी। कंप्यूटर गेम बनाना असंभव था, अगर वोज ने हाई रेज कलर, ग्राफिक्स और साउंड की खोज न की होती। वीडियो डिस्प्ले में इस्तेमाल होने वाला माइक्रो-कंप्यूटर, रिकॉर्डर का मैग्नेटिक डिस्क कंट्रोलर जैसे कई अन्वेषण उनके नाम पर पेटेंट किए गए हैं। ये काम वह अपने विद्यार्थी जीवन से ही कर रहे थे व आज भी कर रहे हैं।

फिर भी वह मानते हैं, ‘मेरा लक्ष्य कभी भी ढेर सारा धन कमाना नहीं रहा, बल्कि मेरा लक्ष्य रहा कि एक बहुत अच्छा कंप्यूटर बना सकूं। हमें अपने कार्य में लोगों और समाज की मान्यता व सम्मान चाहिए था। इसके लिए जरूरी था कि लोग हमारे बनाए गए उत्पाद खरीदें। हमें एक बड़ा फायदा यह मिला कि उन दिनों कंप्यूटर के बारे में हालात कुछ दूसरे थे।’

याददाश्त खो चुके थे वोज
अपनी किशोरावस्था में ही वोज ने पहला वीडियो गेम बना डाला था। 20 साल की उम्र में उन्होंने ह्यूलेट पेकार्ड में नौकरी शुरू कर दी थी, और 26 की उम्र में जॉब्स के साथ ऐपल कंप्यूटर कंपनी बना ली। वह कहते थे कि अगर हम सफल नहीं भी पाए, तो कोई बात नहीं, कम से कम हम बच्चों को यह तो कह ही सकेंगे कि हम जवानी के दिनों में ही कंपनी के मालिक बन गए थे।

फरवरी 1981 में वोज का प्राइवेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनकी जान तो बच गई, पर वह अपनी याददाश्त खो बैठे थे। उस दुर्घटना के हफ्तों बाद तक उन्हें याद नहीं था कि उनका विमान दुर्घटना का शिकार हो गया था। उन्हें रोजमर्रा की बातें याद नहीं रहतीं थीं, वह शारीरिक तौर पर ठीक होने के बाद भी कई हफ्तों तक अपने काम पर नहीं गए। कोई पूछता, तो कहते कि यह वीकेंड है। वह लोगों से ही पूछते कि उन्हें क्या हो गया था, लोग उन्हें दुर्घटना के बारे में बताते तो वह आश्चर्य व्यक्त करते। कुछ माह बाद उनकी याददाश्त धीरे-धीरे लौटी, पर कई बातें वह अब भी भूल जाते हैं।

इस दुर्घटना के कारण उन्हें कुछ  साल मिल गए ऐपल से अलग रहने के लिए और इसी दौरान उन्होंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई फिर से शुरू की और पांच साल बाद वह ग्रेजुएट हुए। इसी दौरान उन्होंने शादी कर ली। जब वह वापस गए, तब कोई पद नहीं संभाला। वह केवल एक इंजीनियर के रूप में रहे, अपनी कंपनी के लिए एक टीम लीडर बस। कंपनी के प्रमुख शेयर होल्डर होने के नाते उनका संबंध ऐपल से अब भी है, लेकिन उन्होंने अपने आप को कई दूसरे कामों से भी जोड़ लिया है।

एकरस न रहें
स्टीव वोज ने अपने जीवन में एकरसता नहीं आने दी। उन्होंने माइक्रोसाफ्ट जैसी कंपनी के सामने अपने लक्ष्य को पाने के लिए तो काम किया ही, लेकिन अपने जीवन में भी विविधता के रंग भरे। अपने खिलंदड़ स्वभाव के कारण जीवन की कई परेशानियों से वह निजात पा सके। वोज पोलो के खिलाड़ी तो हैं ही, एक टीवी रीयल्टी शो ‘डांसिंग विथ द स्टार’ में भी भाग ले चुके हैं। मजेदार बात यह रही कि दस टीमों में उनकी टीम को सबसे कम अंक मिले, यानी वह दसवें क्रम पर रहे, लेकिन उन्होंने अपना उत्साह कम नहीं होने दिया। उन्हें बच्चों को पढ़ाने का शौक है और वह पांचवी कक्षा के बच्चों को भी पढ़ाते रहे हैं।

वोज ने टीवी कॉमेडी शो ‘कोड मंकी’ में भी भाग लिया और और वह एमी अवार्ड कार्यक्रम में भी देखे गए। कई छोटे- बड़े स्थानों पर वह भाषण देने भी जाते हैं और उन्होंने अपनी आत्मकथा भी लिखी है, जिसका शीर्षक है- आई वोज: फ्रॉम कंप्यूटर गीक टू कल्ट आयकॉन। वह एक ऐसे शख्स के रूप में याद किये जाते हैं, जिसने जिंदगी में बहुतेरे काम किए और उसका आनंद लिया। धन तो कमाया ही, लेकिन उसके पीछे पागल नहीं हुए। उन्होंने अपनी जीवनी को ऑनलाइन भी कर रखा है और कोई भी उसे पढ़ सकता है। उन्होंने लिखा है ‘आई एम मेंबर ऑफ चैरिटी लॉज कैपबेल, बट नॉट ऐक्टिव’।

सम्मान से मगरूर न हों
वोज को अनेक सम्मान मिल चुके हैं, विश्वविद्यालयों की उपाधियां, वैज्ञानिक शोध के सम्मान, ‘नेशनल इंवेंटर हॉल ऑफ फेम’, व ‘नेशनल मैडल ऑफ टैक्नोलॉजी’ आदि। उनका मानना है कि सम्मान पाकर जो मगरूर होता है, वह उसका हक खो देता है। ‘सम्मान से विनम्रता आनी चाहिए और धन से भी। ये दोनों ही हमें लोगों से दूर करने के लिए काफी है।’ स्टीव जॉब्स से उनका नाता कई दशक तक रहा, पर जब उन्हें लगा कि अब मन नहीं मिल रहे, तो वह पांच साल तक उनसे दूर रहे। इसी साल उन्हें यूएसए के राष्ट्रपति की तरफ से ‘आउटस्टेंडिंग कंट्रीब्यूशन टु ह्यूमैनिटी थ्रू आई टी’ से नवाजा गया।
प्रकाश हिन्दुस्तानी

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