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हाईकोर्ट ने गुरुगोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय को सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुगोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के उस निर्णय को सही ठहराया है जिसमें फेल होने वाले करीब 5500 छात्रों अगले सत्र में प्रमोट नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगले सत्र में प्रमोट होना फेल होने वाले छात्रों का अधिकार नहीं है।
 
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के. सीकरी व राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने 203 छात्रों की याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। इसके साथ ही पीठ ने छात्रों को पास करने के लिए न्यूनतम 50 फीसदी अंक लाने की अनिवार्यता को नीतिगत मामला बताते हुए इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा विदों की राय लेकर यह यह नीति बनाई है, ऐसे में किसी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

हालांकि हाईकोर्ट ने समय पर परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जाने व पुनमरूल्यांकन नहीं किए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन को भी कड़ी फटकार लगाई है। पीठ ने छात्रों द्वारा समय पर परिणाम घोषित नहीं किए जाने एवं पुनमरूल्यांकन में देरी को आधार बनाते हुए अगले सत्र में प्रमोट की मांग की थी। छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने इन दलीलों को कोर्ट ने ठुकराते हुए कहा है कि यह सही है कि विश्वविद्यालय की भी कुछ गलतियां हुई हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि फेल हुए छात्रों को अगले सत्र में प्रमोट कर दिया जाए।

छात्रों ने विश्वविद्यालय पर अपने कॉलेजों और पंजीकृत कॉलेजों में पढ़ रहे बच्चाों को अंक देने में भेदभाव बरतने का आरोप लगाया था। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय अपने कॉलेजों में आंतरिक परीक्षा में 40 और एक्सटरनल में 60 फीसदी अंक देते हैं जबकि पंजीकृत कॉलेजों में आंतरिक 25 और एक्सटरनल 75 फीसदी रखा है।

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