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सबसे मुश्किल काम था विद्या को राजी करना!

मिलन लूथरिया डर्टी पिक्चर के डायरेक्टर हैं। इस फिल्म के जरिए उन्होंने कई मिथक तोड़े हैं। नसीरुद्दीन शाह से गोविंदा की शैली में डांस और रोमांस कराया है तो विद्या बालन को पहली बार इतनी ग्लैमरस भूमिका में पेश किया है। उन्होंने पहली बार दक्षिण की सेक्स दीवा की कहानी को रुपहले पर्दे पर उतारा है। मिलन हमसे साझा कर रहे हैं इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभव।

जब मैंने फिल्म बनाने के बारे में सोचा तो मेरे दिमाग में यह बात कहीं भी नहीं थी कि यह किसी एक औरत की कहानी होगी। 80 के दशक में यदि आप दक्षिण भारत की हीरोइनों को देखेंगे तो पाएंगे कि वो सभी आइटम गर्ल थीं। उनकी अपनी लोकप्रियता थी। उस समय के कई कलाकारों का नाम आप भूल गए होंगे, लेकिन सिल्क स्मिता या शांति डिस्को आपको अभी तक याद होंगी। मैं ऐसी हीरोइनों की जिंदगी पर ही फिल्म बनाना चाहता था। सिल्क स्मिता की जिंदगी से मुझे सबसे ज्यादा प्रेरणा मिली। हालांकि यह सिर्फ उनकी कहानी नहीं है।

यह कहानी ऐसी डांस गर्ल्स की है, जो उन दिनों दक्षिण की फिल्मों का हिस्सा थीं, जिन्होंने कई पुरुषों को पटकनी दी। जो अपने दिल की कम और दिमाग की ज्यादा सुनती थीं। इस फिल्म के जरिए यह जानने की कोशिश की गयी है कि उनके दिमाग में क्या चला करता था? उनके रिश्ते कैसे होते थे? उनकी निजी जिंदगी की त्रसदी क्या थी? नाम, शोहरत और अपनी कला को वो कैसे संभालती थीं? इसीलिए मैं बार-बार यह कहता हूं कि यह फिल्म सिल्क से प्रेरित जरूर है, मगर सिर्फ उनकी कहानी नहीं है। आप इसे मर्लिन मुनरो की कहानी भी मान सकते हैं, क्योकि वह भी सेक्स सिंबल थीं। उन्हें भी प्यार मिला और प्यार में धोखा भी मिला। उनकी मौत भी उतने ही रहस्यमयी तरीके से हुई, जितनी सिल्क स्मिता की।

सेक्स मेरी फिल्म का अहम हिस्सा है, लेकिन मैंने उतना ही सेक्स डाला है, जितना कि जरूरी थी। दरअसल मेरी फिल्म तो सेक्स के सीन के बिना बन ही नहीं सकती थी, क्योंकि इस फिल्म के जरिए मैंने एक औरत की सेक्सुएलिटी पर फोकस किया है। उसके दिमाग, शरीर और स्पिरिट पर इस तरह से फोकस किया है, जैसे पहले किसी ने नहीं किया। यह एक ऐसी औरत की कहानी है, जो पुरुषों की फैंटेसी में रहती है। आप कह सकते हैं कि मैंने सेक्स को बेचने की कोशिश की है और मैं इससे इंकार भी नहीं करता। लेकिन मैंने सेक्स के साथ अच्छी परफॉर्मेस को भी फिल्म का हिस्सा बनाया है। मेरा मानना है कि अगर बोल्ड सब्जेक्ट पर फिल्म बनाई जाए तो उसकी आधी पब्लिसिटी तो यों ही हो जाती है। इसीलिए मेरा यकीन है कि डर्टी पिक्चर उतनी ही कमाई करेगी जितनी बॉडीगार्ड या दबंग ने की थी।

इस फिल्म के लिए एक बड़ी चुनौती थी विद्या को राजी करना। पहले तो उन्होंने मना ही कर दिया था। वह थोड़ा सा डर गई थीं, लेकिन हमने उन्हें सहज कराया। मैंने उनसे कहा कि जब तुम मर जाओगी तो लोग इस फिल्म को इस तरह से दिखाएंगे जैसे शबाना की अर्थ या वहीदा रहमान की गाइड दिखाएंगे। फिर विद्या को समझ आ गया कि शबाना से लेकर वैजयंती और माधुरी से लेकर रेखा तक सबने बोल्ड भूमिकाएं की हैं, इसलिए वह तैयार हो गयीं।

सबसे आसानी से नसीर साहब तैयार हो गये थे। वह पहली बार में ही फिल्म के लिए मान गए। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में वह सब कुछ करना चाहेंगे। मसलन बारिश में भीगना, ऊंचाई पर जाना वगैरह-वगैरह। वाकई वह इस फिल्म में एकदम अलग शेड में दिखे हैं। पहली बार उन्होंने गोविंदा की तरह डांस और रोमांस किया है। डांस के लिए तो उन्होंने 3 माह की ट्रेनिंग भी ली थी।
निकिता त्रिपाठी

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