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क्योंकि जिम्मेदार बनाना है

यह क्या हो गया? उनकी ड्रीम टीम लड़खड़ा क्यों गई? अपने हर प्रोजेक्ट के लिए एक-एक चीज वह तय करते हैं। टीम उन्होंने ही खड़ी की है। लेकिन इतनी ठोस प्लानिंग के बावजूद कामयाबी क्यों नहीं मिल सकी?

जिम्मेदारी के बगैर जिंदगी नहीं चलती। इसीलिए चिंतक क्रिस्टीन कोर्सगार्ड कहती हैं कि हम चाहे किसी भी रिश्ते में हों, हमें अपने साथ के लोगों को जिम्मेदार बनाने की कोशिश करनी चाहिए। हम अक्सर किसी न किसी बहाने दूसरों को जिम्मेदार बनाने से बचते हैं। उन्होंने अपनी मशहूर किताब ‘क्रिएटिंग किंगडम ऑफ ऐंड्स’ में इस पर खूब चर्चा की है।

अक्सर लीडर एक गलती करते हैं। वे अपनी टीम को जिम्मेदार नहीं बनाते। उनमें जिम्मेदारी की भावना नहीं डाल पाते। एक मायने में वे सिर्फ खुद ही जिम्मेदारी को ओढ़े रहते हैं। ‘मैं हूं न’ का अंदाज काफी दूर तक चलता रहता है। लेकिन जैसे ही चीजें बिगड़ने लगती हैं, वे बदलने लगते हैं। सचमुच जब जिम्मेदारी लेने की बात आती है, तो वे फिसलने और पिघलने लगते हैं। तब वे औरों को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। अपनी टीम को छिपाने के बजाय वे खुद ही उसकी ओट तलाशने लगते हैं। अपनी टीम में हर किसी को जिम्मेदार बनाने की कोशिश करनी चाहिए। पर हम कुछ भी गड़बड़ी होने पर उन्हें जिम्मेदार ठहराने लगते हैं। दूसरे को कुसूरवार ठहरा देते हैं।

जिम्मेदार बनाने और ठहराने में फर्क है। और उसे समझना चाहिए। हमारी जिंदगी का कोई भी रिश्ता हो, वह बिना जिम्मेदारी के नहीं चल सकता। हम जब अपने रिश्ते में किसी को उस जिम्मेदारी से छूट देना चाहते हैं, तो गड़बड़ी करते हैं। रिश्ता तो सिक्के के दो पहलू जैसा होता है। जिम्मेदार न बनाने से सिक्के का एक हिस्सा खोटा होने लगता है। बाद में वह पूरे सिक्के को ही खोटा कर देता है। सो, जिस रिश्ते में जिम्मेदारी पर जोर नहीं होता, उसके टिकने की उम्मीद बहुत ज्यादा नहीं होती।
राजीव कटारा

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  • Web Title:क्योंकि जिम्मेदार बनाना है