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सब सक्रिय हैं

मैं कभी हंसता हूं, कभी उदास होता हूं, कभी खुश होता हूं... क्या कहूं पत्रकार जो हूं। कभी खुशी, कभी गम चलता-रहता है। बस खड़सपन ये कि भाव चेहरे पर नहीं आते। कभी सनसनी कोलावेरी सुन मूड हलका करने का मन करता है, तो कभी संसद में धींगामुश्ती देखकर बाल नोंचने का। ‘टीवी सिंह’ दिन भर चिल्लाता रहता है, ‘अखबार सिंह’ चुपचाप सुबह आकर निकल जाता है।

यह देश अजीब है, यहां सब कुछ चलता रहता है। पीएम अड़े हैं कि रीटेल में एफडीआई पर किसी की नहीं मानूंगा। विपक्ष अड़ा है कि मान जाओ, वरना संसद चलने नहीं देंगे। माया परेशान हैं कि कांग्रेस यूपी में फालतू की लीड ले रही है। राहुल परेशान हैं कि कोई उनको सीरियसली लेने को क्यों नहीं तैयार हो रहा है। इधर यूपी वाले हैरान हैं कि आजकल सब ज्यादा सुन रहे हैं, कोई मुसलमानों को आरक्षण की बात करता है, तो कोई प्रदेश बांटकर विकास की बात। इस घचड़म-पचड़म का भी एक मजा है। सब मस्त हैं, क्योंकि दिल की बात कहने की आजादी है। हमारे नेता ऊपर से चिंतित हैं, अंदर से सचेत।

अन्ना सबके सपने में आते रहते हैं और कान में जोर से चिल्लाते हैं। लोकपाल, लोकपाल, लोकपाल... नेता भड़भड़ाकर उठते हैं, कुछ समय साथ में चिल्लाते हैं। फिर कहते हैं, ये अन्ना भी न हम लोगों की दुकान बंद कराने पर तुले हैं। आजकल हर किरदार सक्रियता से अपनी भूमिका निभा रहा है। दशकों बाद अन्ना ने आकर देश की जड़ता तोड़ी है, युवा सड़क पर आया है। यह अच्छी परंपरा है।
आईबीएन खबर डॉट कॉम में अफसर अहमद

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