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अब बेऊर जेल नहीं जाना चाहते अपराधी

हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पटना । बेऊर जेल में हुई कड़ाई का असर बाहर तक दिख रहा है। पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद अपराधी बेऊर की बजाय फुलवारी जेल में जाना पसंद कर रहे हैं। पिछले दिनों जेल के अंदर हुई ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद जेल में बंद कुख्यातों के मोबाइल रखने पर आफत आ गयी है।

इतना ही नहीं पहले जहां कुछ दबंग बाहर से अपना पसंदीदा खाना मंगाते थे अब उस पर भी जेल प्रशासन ने रोक लगा दी है। अब उन्हें जेल का ही बना भोजन खाना पड़ता है। जेल में बंद रीतलाल यादव, शिवगोप, कुंदन सिंह जैसे कुख्यातों के लिए यह कड़ाई ज्यादा महंगी साबित हो रही है। सूत्रों के मुताबिक जेल अधीक्षक शिवेंद्र प्रियदर्शी के कड़े रवैये से अब कारा प्रशासन के अन्य कर्मी भी परेशान हैं।

प्रतिदिन जेल में तैनात कर्मियों की आमदनी कुख्यातों की मेहरबानी से 500 रूपए तक पहुंच जाती थी। लेकिन अब इनकी दैनिक आमदनी भी बंद हो गई है।जेल कर्मियों की भी होती है तलाशीजेल में तैनात कर्मियों की भी प्रतिदिन तलाशी ली जाती है। जेल अधीक्षक के आदेश के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।

जेल में बने टावर पर डय़ूटी बजाने वाले वाच मैन को भी तलाशी लेने के बाद ही डय़ूटी पर भेजा जाता है। ‘जेल प्रशासन ने अंदर बंद कुख्यातों पर शिकंजा कसा है। इससे अपराध नियंत्रण करने में पुलिस को मदद मिलेगी। पहले अपराधियों को जेल का स्वाद नहीं मिल पाता था जिससे उनका मनोबल ऊंचा होता था।

इस तरह की कार्रवाई से कुख्यातों का मनोबल गिरेगा और उन्हें जेल का मतलब भी समझ आएगा।’उपेंद्र शर्मा, ट्रैफिक सह सिटी एसपी (पश्चिम), पटना

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