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राजा की 200 बीघा जमीन पर कर लिया गया कब्जा

मनोज चतुर्वेदी, मैनपुरी। वर्षो पहले अपने इलाके के राजा रहे धर्मेन्द्र सिंह को शायद ही यह अहसास रहा होगा कि एक दिन उन्हें भी हक के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पडेम्गी। पूरे छह साल से हक की लड़ाई लड़ रहे राजा धर्मेन्द्र सिंह को अब जाकर न्याय की उम्मीद हुयी है। 22 वर्ष पूर्व राजासाहब की जमीन तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी ने धोखाधड़ी करके इलाके के 24 लोगों के नाम कर दी। चकबंदी अधिकारी ने इस सम्बन्ध में न कोई मुकदमा सुना और न ही इस जमीन का बैनामा ही किया गया। वर्तमान में जमीन की कीमत 20 करोड़ रुपये की बताई जा रही है।

जांच के दौरान स्पष्ट हुआ है कि उपरोक्त जमीन का विधिवत बैनामा होता तो सरकार को लगभग बैनामे पर लगने वाले स्टाम्पों में से 10 से 15 करोड़ की आय होती। मामला फिरोजाबाद की तहसील शिकोहाबाद के ग्राम दखनारा से जुड़ा है। जमींदारी उन्मूलन प्रथा से पूर्व दखनारा स्टेट के राजा धर्मेन्द्र सिंह से जब सरकार ने जमीदारी छीन ली तो वे अपने परिजनों के साथ बाहर जाकर बस गए। राजासाहब के परिजनों के नाम 59 एकड़ जमीन थी। वर्ष 1989 में उनके परिजनों के नाम दखनारे स्थित गाटा संख्या 136, 137 व 138 में दर्ज 200 बीघा जमीन पर इलाके के 24 लोगों ने फर्जीबाड़ा कर कब्जा कर लिया और तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी शिकोहाबाद जेपी शर्मा ने बिना मुकदमा सुने और बिना बैनामा कराए इस जमीन को सम्बन्धित लोगों के नाम अभिलेखों में दर्ज करा दिया।

जब जमीन की असली मालिकान को इसकी जानकारी हुयी तो उन्होंने फिरोजाबाद जिला प्रशासन की हर उस चौखट को चूमा जहां उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद थी। 15 फरवरी 2005 को तत्कालीन जिला अधिकारी से भी शिकायत हुयी लेकिन अधिकारियों ने जिलाधिकारी के संज्ञान लेने के बाद भी इस मामले को दबाए रखा। एक सप्ताह पूर्व जिलाधिकारी फिरोजाबाद से पूरन सिंह पुत्र मंगल सिंह निवासी नगला नयनसुख तथा शिकोहाबाद ने फिर इस प्रकरण की शिकायत की तो जिलाधिकारी ने मामले को एसओसी मैनपुरी नितिन चौहान को सौंप दिया। एसओसी मैनपुरी ने इस मामले की जांच की तो पूरा प्रकरण ही फर्जी निकला है। एसओसी के मुताबिक उपरोक्त 200 बीघा जमीन को हेरफेर कर 24 लोगों के नाम किया गया है। इसमें स्टाम्प भी नहीं लगाया गया और न ही किसी तरह का कोई बैनामा हुआ।

एसओसी के अनुसार उन्होंने फिरोजाबाद के मुआफिज खाने से 24 फाइलों में से 17 फाइलें अब तक अपने पास मंगा ली है शेष फाइलों को तलाशा जा रहा है। धोखाधड़ी करने वाले एसीओ पहुंचे स्वर्गलोकमैनपुरी। राजा साहब की जमीन पर अवैध कब्जा तो किया ही गया साथ ही सरकारी मुलाजिमों ने नियम विरुद्ध उसे लोगों के नाम भी अभिलेखों में चढ़ा दिया। खास बात यह है कि 28 अक्टूबर 1989 को इस जमीन को अभिलेखों में दर्ज करने वाले सहायक चकबंदी अधिकारी जेपी शर्मा सेवानिवृत्त तो हो ही चुके हैं और अब उन्होंने इस दुनियां से भी विदा ले ली है।

ऐसे में सवाल उठता है कि राजा साहब को जमीन तो वापस मिल जाएगी, लेकिन इस जमीन पर धोखाधड़ी करके अभिलेखों में चढ़ाने वाले एसीओ पर कार्रवाई किस तरह होगी। यही नहीं चकबंदी लेखपाल कानूनगो की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध रही। श्रेणी 4 की जमीन भी कर दी हस्तांतरितमैनपुरी। राजा साहब की जिस 200 बीघा जमीन पर फर्जीबाड़ा हुआ वह जमीन वर्तमान में व्यवसायिक है और यह जमीन श्रेणी ए की है और पूरी तरह संक्रमणीय है। इसमें कुछ जमीन श्रेणी चार की है। जिसका किसी और के नाम बैनामा या हस्तानांतरण नहीं किया जा सकता। श्रेणी 4 से जुड़ी जमीन दलितों के नाम थी मगर इस जमीन को अधिकारियों ने चंद रुपयों की खातिर दबंगों के नाम दर्ज करा दिया।

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  • Web Title:राजा की 200 बीघा जमीन पर कर लिया गया कब्जा