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50 छात्रों को संस्कृत विवि ने डिग्री देने से लगायी

कार्यालय संवाददाता वाराणसी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने शास्त्री और आचार्य के 50 छात्रों को दीक्षांत समारोह में डिग्री देने पर रोक लगा दी है। कारण, इन छात्रों के परीक्षा फार्म अपूर्ण पाये गए थे। इन छात्रों ने 2010-11 के सत्र में परीक्षा दी थी। पिछले साल फर्जीगिरी रोकने के लिए परीक्षा समिति और कार्यपरिषद ने यह तय किया था कि काटपीट वाले और अपूर्ण परीक्षा फार्मो को निरस्त कर दिया जायेगा। इनका दाखिला भी निरस्त हो जायेगा। इस निर्देश के तहत 3672 छात्रों को परीक्षा फार्म निरस्त कर दिये गए। इसके बावजूद 50 ऐसे परीक्षा फामोर्ं के आधार पर छात्रों ने परीक्षा पास कर ली, जो अपूर्ण थे। मामला उस समय पकड़ में आया जब दीक्षांत समारोह में डिग्री देने के लिए प्रमाणपत्र लेखन का कार्य चल रहा था। नाम की वर्तनी जानने के लिए जब परीक्षा फार्म खोजा गया तो वह अपूर्ण मिले। उसमें नाम भी सही ढंग से अंकित नहीं थे।

अधिकारियों ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि जब अपूर्ण परीक्षा फार्म निरस्त हो गए तो 50 फार्म कहां से आ गए। इसमें से आचार्य के 15 फार्म प्रतापगढ़ के एक कॉलेज के हैं। मामला कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र के यहां पहुंचा तो उन्होंने अधिकारियों और सम्बन्धित पटल सहायकों को फटकार लगायी। डॉ.मिश्र ने बताया कि पूरा मामला संदिग्ध है। इसलिए इन छात्रों को फिलहाल डिग्री देने से रोक दिया गया है। दीक्षांत समारोह के बाद मामले की जांच होगी। उसके बाद निर्णय लिया जायेगा, हो सकता है कि यह संख्या बढ़ जाये। अधिकारियों का कहना है कि इस बार आचार्य की उपाधि का प्रारूप बदले जाने से यह मामला पकड़ में आ गया। आचार्य की डिग्री संस्कृत के साथ-साथ अंग्रेजी में भी दी जायेगी। जब अंग्रेजी में नाम भरने के लिए परीक्षा फार्मों की खोज गई तो मामला सामने आ गया।

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