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मां अन्नपूर्णा दरबार में धान की बाली का ‘कल्पवृक्ष’

वाराणसी। वरिष्ठ संवाददाता। मां अन्नपूर्णा मंदिर में गुरुवार को 17 दिनी व्रत अनुष्ठान का समापन हुआ। मां का दरबार धान की बाली और फूलों से सजा रहा। धान की बाली का कल्पवृक्ष का स्वरूप आकर्षण का केन्द्र रहा। मां अन्नपूर्णा की बटलोई व बाबा विश्वनाथ के खप्पर में अक्षत भर विशिष्ट पूजा की गयी। काशी अन्नपूर्णा अन्न क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी मां अन्नपूर्णा मंदिर के महंत पं. रामेश्वरपुरी जी महाराज ने बताया कि अक्षत व धान की बालियों का वितरण शुक्रवार की सुबह से मंदिर परिसर में होगा। मान्यता है कि घर के भण्डार गृह या खेत में धान की बाली रखने से अन्न की कमी नहीं होती। महंत पं. रामेश्वरपुरी जी महाराज ने बताया कि मां अन्नपूर्णा का अनुष्ठान 17 दिनी होता है। यह व्रत 17 दिन, 17 धागे, 17 गांठ और 17 वर्ष तक करने का विधान है। मंदिर में कई ऐसे व्रती भी दिखे जो पिछले 17 वर्ष से व्रत रहे और मंदिर में पारण करने पहुंचे थे। ऐसे व्रती 17 व्यंजन, सुहाग की 17 प्रकार, 17 सुहागिनी को सुहाग सामग्री अर्पित करती दिखीं। 17 ब्राह्मणों को अलोना (बिना नमक का भोजन) कराया गया। मां का सुबह पंचामृत स्नान किया गया। इसके बाद श्रीसूक्त का पाठ हुआ। श्रीयंत्र की पूजा के बाद मंदिर का पट दर्शन के लिए खुला। मध्याह्न धान की बाली से मंदिर परिसर में कल्पवृक्ष बनाया गया। इसके बाद कन्याओं के द्वारा धान को छीलकर निकाले गए अक्षत को बाबा के खप्पर और मां के बटलोई में भरा गया। इसके बाद मां की विशेष आराधना महंत पं. रामेश्वरपुरी जी व उपमहंत शंकरपुरी ने किया। पूजन के बाद मंदिर का पट पुन: भक्तों के लिए खोल दिया गया।

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