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भारत में बढ़ा भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे की मुहिम के बावजूद घूसखोरी में कोई कमी नहीं आई है। रिश्वतखोरी का मर्ज लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आलम यह है कि भ्रष्टाचार से बुरी तरह प्रभावित सरकार अब संसद में नया कानून लाने जा रही है।

देश में बढ़ते भ्रष्टाचार की गवाही देती ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वर्ष के मुकाबले इस बार भारत आठ अंक नीचे लुढ़का है। वहीं, चीन की स्थिति भारत सहित अन्य पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और नेपाल से कहीं बेहतर है। रिपोर्ट में पांच से कम अंक पाने वाले देशों की स्थिति को चिंताजनक माना गया है।

वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली एक प्रमुख संस्था ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशलन ने 183 देशों में कराए गए सर्वे के आधार पर एक सूची बनाई है, जिसमें भ्रष्टाचाररहित देश को शीर्ष पर और भ्रष्टतम देश को सबसे नीचे रखा गया है। इन देशों की रैंकिंग 10 से शून्य अंक के आधार पर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2010 में भारत 3.1 अंक के साथ 87वें स्थान पर था, जो इस बार 3.3 अंक के साथ 95वें रैंक पर पहुंच गया है।

सूची में औद्योगिक रूप से सम्पन्न जी-20 देशों में कम भ्रष्टाचार वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड आठवें स्थान पर हैं, जबकि न्यूजीलैंड पहले पायदान पर है। दक्षिण एशियाई देशों में नेपाल सबसे भ्रष्ट देश है। सूचकांक 2011 में 183 देशों की रैंकिंग सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार के स्तर के आधार पर तैयार की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में देश में हुए कई घोटालों के चलते भारत की साख को धक्का पहुंचा है। इनमें टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन और कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजन में हुए घोटालों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। हाल ही में ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी रिश्वत दाताओं के सूचकांक में 7.5 अंक के साथ भारत को 19वें स्थान पर रखा गया है, जबकि 2008 में 6.8 अंक के साथ यह इसी स्थान पर था। नवंबर में जारी बीपीआई इंडेक्स 2011 में चीन और रूस क्रमश: 27वें और 28वें स्थान पर थे।

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