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ग्रुप सी लोकायुक्त के दायरे में

विधि, न्याय एवं जन शिकायत मामलों की संसदीय समिति ने लोकपाल बिल पर अंतिम मसौदा रिपोर्ट तैयार कर ली है। हालांकि इसमें निचले स्तर के कार्मिकों को शामिल करने पर सहमति नहीं बनी, लेकिन ग्रुप सी कार्मिकों को राज्यों में नियुक्त होने वाले लोकायुक्तों के दायरे में रखने का सुझाव है।

समिति की आखिरी बैठक हंगामेदार रही। लोजपा के रामविलास पासवान ने बैठक का बहिष्कार किया, क्योंकि लोकपाल में आरक्षण के प्रावधान को मंजूर नहीं किया गया। वहीं, भाजपा, सपा समेत अन्य विपक्षी दलों की नाराजगी थी कि ग्रुप सी कार्मिकों को लोकपाल दायरे में लाने पर सहमति बनने के बाद भी फैसला बदला जा रहा है। भाजपा सहित कई सदस्य असहमति नोट लिखेंगे, वहीं कुछ सीवीसी की तर्ज पर सीबीआई निदेशक की नियुक्ति नहीं जाने पर भी खफा थे। हालांकि प्रधानमंत्री को दायरे में लाने पर भी सहमति नहीं बनी, लेकिन लोकपाल को संवैधानिक दर्जा देने पर सहमति है।

सूत्रों के अनुसार ग्रुप सी कार्मिकों पर विपक्ष के विरोध के बाद इसे राज्यों के जिम्मे छोड़ने पर सहमति बनी। समिति के अनुसार लोकपाल कानून के जरिये लोकायुक्तों की नियुक्ति पर सहमति है। यह राज्यों को तय करना होगा कि दायरे में किस स्तर के कार्मिक आएंगे। देश में ग्रुप सी कार्मिकों की संख्या 60 लाख से ऊपर होने का अनुमान है। कुछ चीजें अभी भी साफ नहीं हैं, मसलन इस प्रक्रिया को अपनाया जाता है तो केंद्र सरकार के ग्रुप सी के कर्मी इसमें आएंगे या नहीं।

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