DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

वर्कप्लेस पर विकलांगों के लिए बढ़ती संभावनाएं

अनेक कंपनियों व संगठनों ने जब विकलांगों को रोजगार दिए तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। केंटुकी चिकन कंपनी ने अपने रेस्तरां में बधिर युवक-युवतियों को वेटर के रूप में नियुक्त किया। ये लोग पर्चे पर लिखित ऑर्डर ले लेते थे और भोजन परोसने से लेकर आगे बिल देकर पैसा लेने तक का काम करते थे। कंपनी के लिए यह प्रयोग अत्यंत सफल रहा। आज जब स्किल्ड कर्मियों और उन्हें कंपनी में बनाए रखने की मांग तेज हुई है, विकलांग जनसंख्या को भागेदारी निभाने का मौका देना कंपनियों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।

तकनीक के युग में विकलांग जनों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। अब भागदौड़ की आवश्यकता कम हो गई है। अनेक काम बल लगाने के स्थान पर मात्र बटन दबाने से हो जाते हैं। आईएसओ 9001:2008 अर्थात गुणता प्रबंधन तंत्र तथा आईएसओ 14001:2004 अर्थात पर्यावरण प्रबंधन तंत्र हर कंपनी व संगठन में लागू किए जा रहे हैं, जिनके कारण कार्यप्रणाली अधिक सरल, स्पष्ट व सुरक्षित होती जा रही है। न केवल शारीरिक विकलांगों के लिए काम करना सरल हुआ है, वरन अल्प मंद बुद्धि लोगों का काम करना भी आसान हुआ है।

कंप्यूटर व सूचना प्रौद्योगिकी ने बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिग, लॉ प्रोसेस आउटसोर्सिग, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिग, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन जैसे कार्यों में विकलांग युवक-युवतियों को कार्य करने के भरपूर मौके दिए हैं। कल-कारखानों में भी अब स्वचालित तथा अर्ध स्वचालित मशीनों की बहुतायत है। इसमें कार्यकुशलता शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती। शोध बताते हैं कि विकलांग जन अपने कार्यस्थल पर अधिक बैठते हैं तथा काम में ध्यान अधिक केंन्द्रित करते हैं।

सहायक युक्तियों का प्रयोग
आज हर प्रकार के विकलांगों के लिए आधुनिक व सुसज्जित सहायक युक्तियां उपलब्ध हैं, जो उनकी कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता तथा गतिशीलता को बढ़ाती हैं। पुरानी सामान्य व्हील चेयरों की तुलना में आधुनिक व्हील चैयर का भार आधा ही होता है। नए कृत्रिम अंग हल्के भी होते हैं। आधुनिक डिजिटल श्रवण सहायक युक्तियों से अधिक साफ सुनाई देता है। शौचालय, लिफ्ट, काउंटर इस प्रकार बने होते हैं कि व्हील चेयर पर बैठा व्यक्ति भी उनका उपयोग कर सके। समाज में विकलांगों की भागेदारी को सुनिश्चित करने के लिए अनेक देशों में कड़े कानून भी बन चुके हैं। वहां भवन-निर्माण का नक्शा, वेबसाइट के डिजाइन आदि को तभी स्वीकृति मिलती है, जब वे डिसेबल्ड फ्रेंडली हों।

मानसिक अवरोध
मानसिक अवरोध के शिकार लोगों के समक्ष अधिक चुनौती होती है। हालांकि प्रौद्योगिकी और विकलांगों की सहायक युक्तियों ने यहां भी विकलांगों की कार्यक्षमता में सुधार किया है, पर अभी भी नियोक्ता पुराने दृष्टिकोण से ही सोचते हैं। सरकारी क्षेत्र में आरक्षण के साथ निजी क्षेत्र में भी प्रयोग के तौर पर रोजगार दिए जा रहे हैं। आज पढ़े-लिखे, कुशल विकलांगों की संख्या तेजी से बढ़ रही हैं।  अनेक विकलांग जनों ने उत्कृष्ट कार्य करके अच्छा नाम कमाया है। बड़े औद्योगिक घराने भी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व में विकलांगों को रोजगार दे रहे हैं।
विनोद कुमार मिश्र
(लेखक पेशे से इंजीनियर व  प्रौद्योगिकी से विकलांगों का जीवन प्रबंधन कैसे बेहतर हो, पर पीएचडी कर रहे हैं।)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:वर्कप्लेस पर विकलांगों के लिए बढ़ती संभावनाएं