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सुनी दिल की आवाज, बनाया परिवार का हिस्सा

एक समय था जब एचआईवी/एड्स पीड़ितों हेय नजरों से देखा जाता था। लोग उनसे कन्नी काटते थे। फिर वक्त बदला और जागरूकता के साथ लोगों की सोच बदली तो इन्हें भी इंसान समझा जाने लगा। पीड़ितों को बराबरी का दर्जा दिया जाने लगा। ऐसे ही लोगों की कतार में आते हैं कमर ज्वाय जैदी और उनकी पत्नी ग्रेस जैदी।

जैदी दंपति ने ऐसे लोगों को न बराबरी का दर्जा दिया बल्कि उन्हें शरण भी दी। ऐसे संक्रमित बच्चों का पालन-पोषण इनके हॉलैंड हाल हॉस्टल स्थित मकान में किया जा रहा है। मशहूर क्रिकेटर और यूपी रणजी टीम के मैनेजर आशीष विंस्टन जैदी के पिता कमर जैदी ने बताया कि 1994 में छह एड्स पीड़ित औरतें रेड लाइट एरिया से पकड़ी गई थीं। पुलिस ने उन्हें काल्विन अस्पताल में रखा था। यहां उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया था। कोई छूता तक नहीं था और खाना भी बाहर से कमरे में फेंक दिया जाता था। ऐसे हालात कमर जैदी उन्हें अपने घर ले आए। उनमें से तीन तो कुछ दिन बाद मर गईं। तब से अब तक करीब दो हजार से ज्यादा संक्रमित रोगियों की देखभाल कर चुके जैदी दंपति ने बताया कि इस तरह के मरीजों की देखभाल के लिए संस्था सोसाइटी ऑफ अंडर प्रिवलेज्ड पीपुल (सूप) का रजिस्ट्रेशन कराया है। इसे आस्ट्रेलिया के ‘टीयर फंड’ से वित्तीय मदद दी जाती है। इन दिनों उनके घर में सात एचआईवी संक्रमित बच्चे हैं। ये सभी बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं। जैदी ऐसे बच्चों को रेड लाइट एरिया, चाइल्ड लाइन और दूसरी संस्थाओं से घर लाते हैं। उन्होंने बताया कि सेवा करने की ये प्रेरणा उन्हें बाइबल से मिली। इसमें दूसरों के लिए जान भी देने की बात बताई गई है। जैदी की भविष्य में जैदी की योजना एक ऐसा शेल्टर हाउस खोलने की है, जहां इन्हें सारी सुख-सुविधा मिलेगी।

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