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धारी देवी के मामले को एएसआई के पास ले जाएं

हाईकोर्ट ने श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के डूब क्षेत्र की जद में आ रहे धारी देवी मंदिर शक्तिपीठ को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस मामले को भारतीय पुरातत्व विभाग के पास ले जाने के आदेश दिए।
 
हाईकोर्ट में बुद्धि बल्लभ चमोली तथा स्वामी आनंद पांडे द्वारा दायर याचिकाओं में कहा गया था कि मंदिर पुरातन है और शक्ति पीठ है। डूब क्षेत्र में आने के चलते इसको अपलिफ्ट किए जाने का प्रस्ताव है।

याचिका में मंदिर के महत्व को दर्शाते हुए कहा गया कि एएसआई ने भी मंदिर के पौराणिक महत्व को स्वीकार किया है। ऐसे में इसको अपलिफ्ट करने से रोका जाना जरूरी है। संयुक्त खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं से यह जानकारी ली कि इस मामले को एएसआई के समक्ष प्रस्तुत किया गया अथवा नहीं। एएसआई को जानकारी नहीं दिए जाने की जानकारी पर संयुक्त पीठ ने याचिकाकर्ताओं को पहले एएसआई के स्तर पर मामले को उठाने के आदेश देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने मामले में पुन: याचिका दायर करने की छूट भी प्रदान की।

एनटीपीसी और सरकार से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने चमोली जिले के रविग्राम जीरो बैंड, जोशीमठ में निर्माणाधीन एनटीपीसी की टाउनशिप में प्रयोग किए जा रहे विस्फोटकों पर रोक लगाने के लिए दायर जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए एनटीपीसी और सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बारिन घोष व न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ ने सुनवाई की। याचिकर्ता शैलेंद्र सिंह ने एनटीपीसी पर विस्फोटकों का उपयोग करने का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया है कि इससे पर्यावरण सहित आम लोगों को खतरा हो रहा है। यही नहीं आसपास के रिहायशी इलाके  में कई मकानों में दरार आ गई है और विस्फोट के चलते लोगों के घरों में पत्थर गिर रहे हैं। इससे जानमाल का खतरा भी बना हुआ है।

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