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दो हफ्ते में बताओ कौन से स्कूल कर रहे हैं धांधली

समाज के कमजोर आय वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क कोटे के तहत कम से कम दाखिला देना पड़े इसके लिए राजधानी के निजी स्कूलों ने नई तरकीब खोज निकाली है। स्कूलों ने इस तरकीब का पिछले साल नर्सरी कक्षा में दाखिला देने में जमकर इस्तेमाल किया। हाईकोर्ट ने करीब 100 से अधिक स्कूलों पर लगाए गए इन आरोपों को चिंताजनक बताते हुए सरकार से रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के सीकरी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने कहा है कि सरकार को नोटिस जारी कर मामले की तहकीकात करने एवं दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका में कहा गया है कि 100 से अधिक निजी स्कूलों ने शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत समाज के कमजोर आय वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के प्रावधानों का पालन नहीं किया।  उन्होंने कहा कि स्कूलों ने 25 फीसदी सीटों पर समाज के कमजोर आय वर्ग के बच्चों को दाखिला नहीं देना पड़े, इसके लिए लिए नर्सरी में सीटें कम कर दी है।  अधिवक्ता अग्रवाल ने यह भी कहा कि सरकार ने न तो इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की ओर न ही नि:शुल्क कोटा के तहत दाखिला देने के लिए जिला नियंत्रण समिति का गठन किया है।

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