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गोरखपुर..कुछ अलग : रंग लगा रहे बच्चों के जख्म पर

भ् बीआरडी मेडिकल कालेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड की दीवार बनी उम्मीदों का कैनवासभ् इंसेफेलाइटिस के मातम भरे माहौल में नन्हीं उम्मीदों को समेटने की कोशिशअजय कुमार सिंह गोरखपुररंग, बच्चों को अच्छे लगते हैं। उनकी क्रिएटिविटी बढ़ाते हैं। इससे बच्चों का विकास अच्छा होता है और उनके दिमाग में दीन-दुनिया की समझ भी बढ़ती है लेकिन नई बात यह है कि अब इन्हीं रंगों को बीआरडी मेडिकल कालेज के उस कोने में समेटने की कोशिश हो रही है जहां पिछले 33 साल से मायूसी और मातम है। माँ-बाप के सीने से चिपटे बच्चों जहां मजबूरी में लाए जाते हैं और माँ-बाप के दिल का डर, बेचैनी और रुलाई का सिलसिला लगातार चलता रहता है, वहां रंगों का यह कैनवास बच्चों को मुस्कुराने का निमंत्रण देता है। बाल रोग विभाग के इन वाडरें में नन्हीं शरारतों, खिलखिलाने, चहचहाने और किसी भी जिद पर अड़ जाने के लिए मशहूर बच्चों भरे हैं लेकिन यहां उन चिरपरिचित बातों की जगह चिल्लाहट, रोना-धोना, अफरातफरी का माहौल रहता है। कोशिश इसी माहौल में एक कोने को खुशनुमा बनाने की है। मौत और मातम से कुछ पल की जिन्दगी चुराने और धुंधली उम्मीदों को रंगबिरंगा कैनवास देने की है। सो, डाक्टरों-नर्सो ने मिलकर वार्ड नम्बर दस के एक कोने को ‘मिकी माऊस’ जैसे कार्टूनों और कॉमिक्स के अन्य पात्रों से सजा दिया है। इस वार्ड में अधिकांश ऐसे बच्चों हैं जिनकी हालत में लम्बे इलाज से सुधार हुआ लेकिन कुपोषण इतना है कि सामान्य स्थिति में नहीं लौट पा रहे।ऐसे बच्चों को उनकी माँ के साथ यहां कुछ दिन के लिए रोक लिया जाता है। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो.कुशवाहा की देखरेख में उन्हें संतुलित और नियमित डाईट दी जाती है। हर रोज की ग्रोथ रिकार्ड होती है और हालत बिल्कुल ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। इतने दिन वार्ड के बिस्तर पर पड़े-पड़े बच्चों मायूसी में दिन गुजारते थे। लेकिन दीवार पर रंगबिरंगे कार्टूनों के बनने से इस मायूसी में कुछ तो खलल पड़ा ही है। दुआ यह कि धीरे-धीरे नन्हीं शरारतें, खिलखिलाना, चहचहाना और जिद करना जैसी बाल सुलभ चीजें भी इनकी जिन्दगी में लौट आएं।हाईलाइटरयकीन जानिए, दीवार पर बने इन कार्टूनों को देखकर जब बच्चों मुस्कुराते हैं तो मन खुश हो जाता है। जिंदगी और मौत से जूझ रहे बच्चों की एक मुस्कुराहट जो सुकून देती है, उसे शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता। दिनेश कुमार, पीडिम्त बच्चों के पिता, सीवान, बिहार हाईलाइटर‘रंगों का बच्चों के मन पर बहुत सकारात्मक असर पड़ता है। बीमार बच्चों के वार्ड में दीवारें रंगीन हों या उन पर कुछ रंग-बिरंगे चित्र बने हों तो हेल्थ रिकवरी तेजी से होती है। रंग खालीपन को भर देते और मन को प्रफुल्लित कर देते हैं।’डॉ.सी.बी.मद्धेशिया, मनोचिकित्सकं

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