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युवाओं को लपेटे में ले रहा एड्स

 कार्यालय संवाददाता फरीदाबाद। एनसीआर के प्रमुख शहरों में एक फरीदाबाद के युवाओं में एड्स रोग तेजी फैल रहा है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस वर्ष अब तक 165 रोगियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें 60 फीसदी से अधिक 18 से 30 आयु वर्ग के हैं। वे भी छात्र। एड्स के भयावह रूप लेने का मुख्य कारण असुरक्षित यौन संबंध और ड्रग्स लेने की बढ़ती लत को माना जा रहा है। एड्स की चपेट में आने वाले ज्यादातर उच्च मध्यम वर्गीय परविार के बिगड़ैल औलादे हैं।

मौजमस्ती के चक्कर में ये खुद को मौत के मुंह में झोंक रहे हैं। रेडक्रॉस की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि जिले में करीब आठ सौ सेक्स वर्कर सक्रिय हैं। जिनमें से 72 ऐसी हैं जो एचआईवी का शिकार हैं।युवा वर्ग का एक धड़ा इनके संपर्क में लगातार है। ये महिलाएं और युवा ही सिफलीस, गनोरिया सहित दूसरी गंभीर यौन बीमारियों का प्रसार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लापरवाही के चलते बाद में यही एड्स बदल जाती है। इसकी रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं कारगर साबित नहीं हो रही हैं। इसका ही नजीता है कि ईएसआई और बीके अस्पताल में रोजाना करीब 25 गुप्त रोगी आ रहे हैं। कई के जांच के दौरान उनके एचआईवी से ग्रस्त होने का पता चलता है।

जीवा आयुवैदिक रिसर्ज सेंटर के निदेशक डॉ. प्रताप चौहान : आयुव्रेद में भी एड्स की रोकथाम के लिए कई रिसर्च चल रहे हैं। यह बीमारी काफी पुरानी है। आयुर्वेद में इसे ओजक्ष के नाम से जाना जाता है। इससे ग्रस्त रोगी में बीमारी से लड़ने की क्षमता खत्म हो जाती है। आयुर्वेदिक दवा के रेगूलर प्रयोग से इसे काबू में किया जा सकता है। कई लोगों से एक साथ संबंध रखने से यह बीमारी फैलती है। चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिल कुमार: यौन संबंध के दौरान सुरक्षात्कम कदम नहीं उठाने से एड्य पनप रहा है। गुप्त रोगियों में एड्स होने की संभावना अधिक है। ब्लड बैंक इंचार्ज व सेंटीलेंस सर्विलेंस अधिकारी डॉ. सविता यादव : एड्स के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है। लेकिन गुप्त रोगी भी बढ़ रहे हैं। गुप्त रोग की समय पर पहचान होने पर इलाज संभव है।मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. टीआर जजोर: आधुनिकता का असर युवाओं की जीवनशैली पर पड़ रहा है।

मौजमस्ती के चक्कर में वे सावधानी को नजरंदाज कर जाते हैं और रोग के शिकार हो जाते हैं। एड्स के मामले में संवेदनशील क्षेत्र- सेक्टर: 7, 15, 21, सुरजकुंड, बदरपुर बॉर्डर, ओल्ड फरीदाबाद, मथुरा रोड, डबुआ कॉलोनी, राजीव नगर, जवाहर कॉलोनी, नीलम चौक, रेलवे स्टेशन, बीके चौक आदिपिछले पांच वर्षो में एड्स मरीजों की संख्यास्त्री पुरुष वर्ष 2005 : 09 20 वर्ष 2006 : 16 23 वर्ष 2007 : 19 35 वर्ष 2008 : 23 48 वर्ष 2009 : 37 85 वर्ष 2010 : 39 142वर्ष 2011 : 165 (स्रेत स्वास्थ्य विभाग)रोकथाम की योजनाएं- एआरटी सेंटर- एसटीडी क्लीनिक- गुप्त रोगियों की जांच- बीके व ईएसआई अस्पताल में काउंसलिंग सेंटर- इंजेक्शन के दौरान मेन्यूनल सिरिंज पर रोक- एक सिरिंज से कई लोगों द्वारा नशा लेना- सेक्स वर्कर को एड्स से बचाव के विषय में जानकारी मुहैया कराना- सेक्स वर्करों की पहचान करना- स्कूल, कॉलेज, निजी कंपनी व ट्राग्रेटेड ग्रूप को एड्स के प्रति जागरुक करना- गंभवर्ति महिलाओं की जांच करना- ब्लड डोनेशन के दौरान एड्स की जांच करनायोजना के तहत फंड - वर्ष 2011 : 12 लाख 81 हजार 400 रुपये- वर्ष 2009 : 5 लाख 65 हजार 96 रुपयेइसके रोकथाम के लिए काम करने वाली संस्था- पहल फाउंडेशन, शरण और रेडक्रॉस सोसाइटीं

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