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मंच पर पंडवानी की साधना, श्रोता भावविभोर

वाराणसी। वरिष्ठ संवाददाता पद्मभूषण डॉ. तीजनबाई। उम्र 55 वर्ष। गायन विधा पंडवानी की सर्वश्रेष्ठ साधिका। आर्य महिला पीजी कॉलेज के मंच पर बुधवार को तीजनबाई ने चर्चित कथा महाभारत को अनूठे अंदाज में पेश किया। उम्र का बंधन तो पीछे छूटा ही, साथ ही आदिवासी समाज पर पिछड़ेपन की बंदिश भी दरक गयी। औरत होते हुए भी बातचीत में तो दर्द उभरा लेकिन मंच पर उतरीं तो जोश और उल्लास के साथ महाभारत की गाथा को लयबद्ध सुनाया।

वो कथा सुनाती गयीं और श्रोता कथारस में हिचकोले लेते रहे। तीजनबाई ने महाभारत कथा का आधार रखा और फिर द्रोपदी चीर हरण की कथा को भावपूर्ण गायन के साथ प्रस्तुत किया। कथा के बीच-बीच में अरे., हे. शब्द जोश को बढ़ा रहे थे। उन्होंने दुर्योधन की बदनियति और भीष्म की लाचारगी को शब्द दिये तो पांडवों की वीरता को भी ललकारा। लाचार और हर तरफ से निराश द्रौपदी जब श्रीकृष्ण से याचना करती हैं, दृश्य ने न केवल लोगों को भावुक किया बल्कि प्रस्तुति ने श्रोताओं के दिल और दिमाग को झकझोर दिया।

सामान्य भाषा में तीजनबाई ने कहा कि द्रौपदी के समान ही सभी की स्थिति है। जब अपने साथ छोड़ देते है तो भगवान ही एकमात्र रखवारा होता है। पति ने साथ छोड़ा, पारिवारिक रिश्ते ने साथ छोड़ा, भरी सभा में किसी की बहू, किसी की पत्नी, किसी की भाभी का वस्त्र खींचा जा रहा था। ईश्वर कभी अन्याय बर्दाश्त नहीं करता है। तीजनबाई का साथ सहगायक के रूप में केशव ठाकुर, हारमोनियम पर एस दास, तबले पर केवल प्रसाद देशमुख, ढोलक पर नरोत्तम नेताम और बेंजो पर टी यदु ने दिया। संचालन डॉ. कविता आर्य ने किया। समारोह में डॉ. चन्द्रकांत मिश्र, डॉ. शशिकांत दीक्षित, प्राचार्या डॉ. रचना दुबे, डॉ. भावना गुप्त, डॉ. रीना चैटर्जी, डॉ. भानुमति मिश्र, डॉ. मधुमिता भट्टाचार्य, डॉ. सुरेन्द्र नायक, डॉ. असंग पाउ, प्रियंका, श्वेता, सुरैय्या आदि मौजूद थीं।

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