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शोध पंजीकरण की जांच को बनी एक और समिति

वाराणसी कार्यालय संवाददाता। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अवैध शोध पंजीकरण के मामले में जांच के लिण् एक और समिति का गठन किया गया है। समिति इतिहास विभाग में हुई अनियिमितता के दोषियों की पहचान कर शीघ्र रिपोर्ट सौंपेगी। जांच समिति पता लगायेगी कि मसले में शिक्षक और कर्मचारी किस स्तर तक दोषी हैं।

समिति में प्रो. ओमप्रकाश सिंह, प्रो. कल्पलता पांडेय, प्रो. केएस जायसवाल और उपकुलसचिव इंदुपति झा शामिल हैं। समिति के गठन की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय में हड़कम्प की स्थिति है। संभावित है कि जांच में कई शिक्षक और कर्मचारी घेरे में आ सकते हैं। 2007 से 2009 के बीच शोध पंजीकरण में अनियमितता के मामले में रिपोर्ट सितम्बर में ही पेश कर दी गई थी, इसका खुलासा आरटीआई एक्टिविस्ट सुधांशु सिंह के जनसूचना अधिकार के तहत रिपोर्ट की प्रति हासिल करने के बाद हुआ।

रिपोर्ट से सीट से अधिक प्रवेश के मामले सहित कई अन्य घपले उजागर हुए हैं। समिति ने इतिहास विभाग, वित्तविभाग, यूजीसी यूनिट, शोध अनुभाग और कुलसचिव कार्यालय के कामकाज को भी लपेटे में लिया था। समिति की रिपोर्ट कुलाधिपति के यहां भी भेजी गई है। कुलाधिपति के निर्णय की प्रतीक्षा भी विवि प्रशासन कर रहा है।

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