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अविरल गंगा के लिए बंदरों को महाभोज

वाराणसी। वरिष्ठ संवाददाता। गंगा की अविरलता और निर्मल प्रवाह की कामना के साथ संकटमोचन मंदिर में बुधवार को अनूठा आयोजन हुआ। शास्त्रानुसार शिव की जटाओं से गंगा धरा पर आयीं हैं, शिव के रूद्र स्वरूप हनुमान जी हैं। इसलिए शिव काशी मंच के सदस्यों ने बंदरों को महाभोज अर्पित कर, गंगा की स्वच्छता के लिए प्रार्थना की। आमतौर पर भोजन के लिए बंदर छीनते-झपटते दिखते हैं, लेकिन संकटमोचन में नजारा इतर रहा, बंदरों के सामने फलों का अम्बार था और खिलाने वाले नतमस्तक थे।

बंदर महाभोज में करीब 100 दर्जन केला, 50 किलो सेब, लड्डू व चना परोसा गया। भोज के पहले भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण व हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष गंगा रक्षा के लिए सामूहिक प्रार्थना की गयी। संकल्प, पूजन-अर्चन और भोज के बाद धर्मसभा का आयोजन हुआ। मंच प्रमुख संजय पांडेय ने कहा कि मां गंगा यदि प्रदूषित हुयीं तो 36 करोड़ लोगों का जीवन भी नष्ट हो जायेगा। भगवान श्रीराम ने भी भाई भरत से कहा ‘कपि से उरिण हम नाही’। जब भगवान श्रीराम बंदरों के ऋणि हैं, तो ऐसे महान जीव को पूजकर, मानव भी गंगा रक्षा के लिए ईश्वर तक प्रार्थना पहुंचा सकता है। अध्यक्षता डॉ. गिरीश तिवारी तथा संचालन रमेश यादव ने किया। धन्यवाद डॉ. माधुरी पांडेय ने दिया। आयोजन में ललित बहादुर सिंह, बृजेश पहलवान, बब्बू शुक्ल, सत्यनारायण पटेल, हिमांशु लखोटिया, अरविंद गिरि, दिनेश गिरि, कृष्णा उपाध्याय, अमर पांडेय, संतोष पांडेय, अविनाश पांडेय, मिंटू पटेल, सोनू मिश्र, भूपेन्द्र यादव, खन्डे कुशवाहा, रामविलास विश्वकर्मा, गुड्डू मिश्र, घूरे सोनकर आदि शामिल थे।

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