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जरूर पढ़ेपहले रॉन्टजेन-रे के नाम से जानी जाती थी एक्स-रे

Mon, 07 Nov 2011 06:31 PM
पहले रॉन्टजेन-रे के नाम से जानी जाती थी एक्स-रे

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नयी क्रांति लाने वाली एक्स-रे किरणों को पहले रॉन्टजेन रे के नाम से जाना जाता था। एक्स-रे किरणों का नामकरण पहले इसके अविष्कारक विलहेल्म कोनराड रॉन्टजेन के नाम पर किया गया था, बाद में इसे एक्स-रे नाम दिया गया।

आज विज्ञान के इस वरदान रूपी चमत्कार का अविष्कार हुए 130 साल से ज्यादा समय हो गया है लेकिन समय के साथ चिकित्सा विज्ञान में इसकी प्रासंगिकता और योगदान बढ़ता ही चला गया।

एक्स-रे किरणों की बात करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के शिक्षक प्रोफेसर अगम कुमार क्षा ने कहा कि एक्स-रे कम तरंगदैर्ध्य का विद्युत चुंबकीय विकिरण है जिसका प्रयोग विज्ञान की अगल-अलग शाखाओं में होता है।

इसका प्रयोग फेफड़े के कैंसर, निमोनिया, आंत की बिमारियों, किडनी की बीमारियों आदि का पता लगाने में किया जाता है। इसका प्रयोग कैंसर की बीमारी के इलाज के लिए भी किया जाता है। कैंसर के इलाज में एक्स-रे का प्रयोग रेडियोथैरेपी कहलाता है।

प्रोफेसर क्षा ने कहा कि एक्स-रे का अविष्कार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को रॉन्टजेन की एक अनुपम भेंट है। इस क्रांतिकारी खोज के लिए रॉन्टजेन को 1901 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

एक्स-रे किरणें विज्ञान के विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी काफी मददगार होती हैं। इसका प्रयोग कर चिकित्सा विज्ञान के छात्र मानव शरीर के अंगों का अध्ययन करते हैं। एक्स-रे फोटोइलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोस्कोपी का प्रयोग कर भौतिक विज्ञान के छात्रों को सतह विज्ञान के अध्ययन में मदद मिलती है।

एक्स-रे का प्रयोग विज्ञान की कई शाखाओं में किया जाता है। इनमें चिकित्सा विज्ञान, भौतिक विज्ञान, खगोलीय विज्ञान आदि शामिल हैं। इसने विज्ञान को एक नया आधार दिया और मानव जीवन को सरल बनाया।

एक्स-रे के प्रयोग पर बात करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से एक्स-रे किरणों के विषय पर शोध कर रहे अभिनंदन राय ने कहा कि एक्स-रे का प्रयोग चिकित्सा विज्ञान के अलावा कई दूसरे क्षेत्रों में भी किया जाता है।

इसका प्रयोग हवाई अड्डों, मेट्रो और रेलवे स्टेशनों आदि पर यात्रियों के सामान की सुरक्षा जांच में किया जाता है। इसका प्रयोग फाइन आर्ट फोटोग्राफी में भी किया जाता है। चित्रकारी में भी एक्स-रे किरणों की जरूरत पड़ती है। इसका प्रयोग चित्रों के रंगद्रव्यों या पिगमेंटस के अध्ययन के लिए किया जाता है।

राय ने कहा कि एक्स-रे का प्रयोग इंडस्ट्रीयल रेडियोग्राफी के लिए भी किया जाता है। वहां इसका प्रयोग कलपुर्जों आदि की जांच के लिए किया जाता है। सीमा सुरक्षाकर्मी एक्स-रे का प्रयोग कर ट्रकों और दूसरे भारी वाहनों के आंतरिक भागों का निरीक्षण करते हैं।

एक्स-रे पर रॉन्टजेन के अलावा और भी कई वैज्ञानिकों ने शोध किए। इनमें निकोला टेस्ला, फिलिप लेनार्ड, थॉमस एडिसन, रसेल रेनॉल्डस जैसे कई वैज्ञानिक शामिल हैं। आज एक्स-रे किरणों के प्रयोग से जो भी क्रांति संभव हुई है उसमें इन वैज्ञानिकों का बहुत बड़ा योगदान है।

इन वैज्ञानिकों ने एक्स-रे के स्वरूप, अलग—अगल प्रयोगों आदि से विज्ञान जगत को रूबरू कराया जिसके लिए इन वैज्ञानिकों को आने वाली पीढ़ियां भी याद करेंगी।

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