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29 नवंबर, 2020|3:56|IST

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रखें ख्याल, नाजुक है दिल

आज के भागमभाग वाले समय में खासकर कामकाजी महिलाओं में हार्ट अटैक की समस्या बढ़ती जा रही है। इसके कई कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है अपने ऊपर पर्याप्त ध्यान न देना। इससे दिल पर दबाव बढ़ता है और समस्याएं शुरू हो जाती हैं। सुमन बाजपेयी का आलेख

आजकल महिलाओं में बढ़ती हार्ट अटैक की समस्या उनका संवेदनशील होना तो है ही, साथ ही जीवनशैली में तेजी से आया बदलाव भी इसकी एक वजह है। उचित डाइट, एक्सरसाइज और नींद की कमी भी इसका प्रमुख कारण है, जो तनाव की वजह बनता है। कोरोनरी हार्ट डिजीज से पीड़ित महिलाओं का इलाज संकुचित हो गई रक्त धमनियों को खोलकर किया जाता है, जिस प्रक्रिया को चिकित्सीय भाषा में एंजियोप्लास्टी कहा जाता है। एक धमनी की बीमारी में यह प्रक्रिया सबसे ज्यादा कारगर साबित होती है। एंजियोप्लास्टी की सफलता महिलाओं व पुरुषों में बराबर रहती है। यह उसके लिए उपयोग किए गए उपकरणों व लेसियन (कट) के प्रकार पर निर्भर करता है। इसकी सफलता इससे जुड़ी जटिलताओं व परेशानियों पर भी निर्भर करती है और महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा जटिलताएं देखी गई है।

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निशीथ चंद्रा के अनुसार, ‘पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा महिलाएं इस प्रक्रिया के बाद चिकित्सीय समस्याएं लेकर हमारे पास आती हैं। इस प्रक्रिया के तीस दिन बाद जो सबसे बड़ी समस्या महिलाएं लेकर आती हैं, वह होती है डायबिटीज की। यही नहीं, एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के दौरान रक्त को पतला करने के लिए दी गई दवाइयों की वजह से उनमें ब्लीडिंग की मात्र अधिक बढ़ जाती है। महिलाओं की रक्त धमनियां का साइज छोटा होने के कारण उनमें वैस्कुलर जटिलताएं भी ज्यादा देखने को मिलती हैं। हालांकि नए कैथेटर्स (एक पतली, खोखली ट्यूब, जिसे डालकर धमनियों को खोला जाता है) की वजह से अब स्थिति में सुधार आ रहा है। बैलून-एंजियोप्लास्टी (धमनी में बैलून डाला जाता है) की तुलना में स्टेंट्स (तार के छोटे लूप (जिन्हें धमनियों को खोलने के लिए अंदर डाला जाता है) के बढ़ते उपयोग की वजह से भी महिलाओं में जटिलताएं व दिक्कतें कम होती हैं। एंजियोप्लास्टी के बाद रेस्टेनोसिस एक आम समस्या होती है। इसमें प्रक्रिया के कुछ महीनों बाद धमनियां धीरे-धीरे संकुचित होने लगती हैं और छाती में दर्द रहने लगता है।.

अगर आपको कोरोनरी हार्ट डिजीज है तो पहले अपने फिजिशियन से सलाह लें, फिर कौन-सा ट्रीटमेंट करवाना सही होगा, इसके लिए अपने कार्डियोलोजिस्ट से परामर्श लें। वही आपकी हेल्थ और लाइफ स्टाइल के अनुसार सही प्रक्रिया चुनने की सलाह दे सकता है। जो महिलाएं एंजियोप्लास्टी करवाती हैं, उन्हें उसी चिकित्सक के पास जाना चाहिए, जिसके पास सारी नवीनतम सुविधाएं तो हों ही, साथ ही कैथेटर्स का प्रयोग करने में अनुभवी व दक्ष भी हो। आखिर मामला नाजुक दिल का है, जिसकी सेहत की जिम्मेदारी आपकी है।

हार्ट ट्रेंड्स

कई लोग बहुत इमोशनल व दूसरों पर निर्भर होते हैं। अगर वह इमोशनल टच अचानक खींच लिया जाता है तो उन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे हार्ट अटैक आ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, जो लोग अत्यधिक भावुक होते हैं, उनके लिए अत्यधिक दुख व खुशी दोनों ही स्थितियां खतरनाक होती हैं। इस भावुकता की वजह से हार्ट अटैक आ सकता है।

कुछ लोग हमेशा हर चीज और बात को नकारने की स्थिति में रहते हैं और चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं या किसी की देखभाल या सहयोग को लेने से मना कर देते हैं। इससे उनकी हेल्थ पर असर पड़ता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। चेतावनी के संकेतों को नजरअंदाज करने का बहुत असर पड़ता है। संकेतों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए हार्ट अटैक गंभीर हो सकता है।

कुछ लोग इतना ज्यादा डिप्रेशन में रहते हैं कि उनकी सोच निराशावादी हो जाती है। ऐसी अवसादपूर्ण मनोदशा हार्ट अटैक का कारण बनती है। डॉक्टरों के अनुसार, डिप्रेशन व्यक्ति की मानसिक अवस्था को प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में अगर परेशान करने वाला वातावरण उसे मिलता है, तो उससे नेगेटिव एनर्जी निर्मित हो जाती है और उस कारण डिप्रेशन की स्थिति बन जाती है, जो हार्ट अटैक का कारण बन जाता है।
(फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट के इंटरवेंशनल डायरेक्टर डॉ. अतुल माथुर से बातचीत पर आधारित)

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