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सरकार के पास जादू की छड़ी नहीं: PM

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लालकिले के प्राचीर पर राष्ट्रध्वज फहराकर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारी प्रगति में बाधा डालने के लिए कुछ लोग देश में गड़बड़ी पैदा करना चाहते हैं।

भ्रष्टाचार के मामले पर प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीने में भ्रष्टाचार के मामलों में केंद्र और राज्य सरकार के लोगों पर आरोप लगे हैं, हम ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त से सख्त कदम उठायेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम जल्द ही लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए कानून बनाएंगे। उन्होंने कहा कि यह समय है कि हम अपने व्यक्तिगत और राजनैतिक हितों से ऊपर उठें और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आम सहमति बनाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों पर विचार करते समय ऐसा माहौल नहीं पैदा करना चाहिए जिससे देश की प्रगति पर सवाल खड़ा हो जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार कई शक्लों में सिर उठा रहा है, कई मामलों में आम आदमी की कल्याण योजनाओं में आवंटित धन सरकारी कर्मचारियों की जेब में चला जाता है। कई अन्य मामलों में कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई एक बड़ा कदम भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं कर सकता है, हमें कई मोर्चों पर इसके विरूद्ध कदम उठाना होगा।

मनमोहन सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए हमें न्याय देने की प्रणाली में सुधार करना होगा, अगर यह प्रणाली प्रभावकारी बनी तो सरकारी अधिकारियों को लालच या राजनीतिक दबाव में भ्रष्ट कदम उठाने से पहले दो बार सोचना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कुछ पदों पर भ्रष्टाचार रोकने के लिए हम मजबूत लोकपाल चाहते हैं, इस संबंध में हमने संसद में विधेयक पेश किया, अब यह केवल संसद को तय करना है कि कैसा लोकपाल विधेयक बने।

उन्होंने सिविल सोसाइटी और अन्ना हजारे का नाम लिए बगैर कहा कि जो लोग लोकपाल विधेयक से सहमत नहीं हैं, वह अपने विचार संसद, राजनीतिक दलों और मीडिया तक को दे सकते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि उन्हें भूख हड़ताल और अनशन जैसे रास्तों को नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को लोकपाल के दायरे में लाना उचित नहीं है, यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता के विरुद्ध होगा। लेकिन एक ऐसे ढांचे की आवश्यकता जरूर है जिसमें न्यायपालिका जवाबदेह बने।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुर्लभ संसाधनों और धन संबंधी आवंटनों में सरकार के विवेकाधिकार का कई बार दुरुपयोग होता है। जहां जहां संभव होगा ऐसे विवेकाधिकारों को समाप्त किया जायेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी स्तरों पर शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने के वास्ते नया शिक्षा आयोग स्थापित किया जायेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार पर मैं इतना अधिक इसलिए बोला क्योंकि मैं जानता हूं कि यह समस्या हम सबको गहराई तक परेशान कर रही है, हालांकि यह एक ऐसी परेशानी है जिसे दूर करने के लिए किसी सरकार के पास जादू की छड़ी नहीं है।

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