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सतनपुर की वीरान पहाड़ी पर लौटी हरियाली

बोकारो प्रतिनिधि। शहर से सटे सतनपुर पहाड़ पर जहां सिर्फ पेड़ों के ठूंठ नजर आते थे। अब वहां बड़े-बड़े पेड़ नजर आ रहे हैं। यूं कहें कि करीब एक दशक से वीरान पड़ी सतनपुर की पहाड़ी पर हरियाली लौट आई है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। यह सब संभव हुआ है आस-पास के ग्रामीणों की इच्छा शक्ति की बदौलत।

पहाड़ी के किनारे बसे बाघरायबेड़ा के रामदयाल गोखुल और संथालडीह के हेमू मांझी बताते हैं कि करीब छह साल पहले ग्रामीणों की एक टीम तैयार की गई। जिसमें कई लोगों को शामिल किया और लोग जंगल की सुरक्षा में लग गए। उन दिनों यह इलाका धनबाद वन प्रमंडल क्षेत्र के अंतर्गत आता था। इसलिए धनबाद के तत्कालीन डीएफओ संजीव कुमार और केंद्रीय वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष जगदीश महतो को बुलाया गया।

उन्होंने पहाड़ी का भ्रमण करते हुए लोगों को जंगल का महत्व बताया। इसके बाद एक बैठक सतनपुर उच्च विद्यालय परिसर में हुई, जिसमें जंगल को बचाने का संकल्प लिया गया। आज हालात यह है कि अब यहां चारों ओर हरियाली ही हरियाली नजर आ रही है।

शहर बनने के दौर में कटा था जंगल

बोकारो शहर निर्माण का दौर जब चल रहा था। उन दिनों ही सतनपुर पहाड़ी के घने जंगल का सफाया कर दिया गया था। यह कहना है सामाजिक कार्यकर्ता सह आसस के सचिव योगो पूर्ति का। उन्होंने बताया कि उस दौरान पेड़ों की व्यापक पैमाने में कटाई हो रही थी। जिसके बाद नए पेड़ों को लगाने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई जिसके कारण इलाका वीरान हो गया था।

वन विभाग नहीं कर रहा सहयोग

सतनपुर पंचायत क्षेत्र में लंबे क्षेत्रफल में वनभूमि एवं कई छोटी-छोटी पहाड़ियां हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी इलाके में पौधरोपण आदि के लिए गंभीर नहीं होते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार विभाग के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अधिकारी उनसे मिलना तक नहीं चाहते।

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