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हनुमानगनर में तीस घंटे से बिजली नहीं

वरीय संवाददाता पटना। हनुमाननगर के लगभग 160 घरों में 30 घंटे से अधिक समय से बिजली नहीं है। बिजली नहीं रहने से सबसे बड़ी परेशानी पानी की हो गयी है। मोहल्ले में एक ही चापाकल है जिसपर लोगों की लाइन लगी रहती है। आसपास में स्थित बोरिंग से पानी लाने जाना पड़ता है। इस वजह से बड़ी मुश्किल से रसोई बन पाती है।

वह भी समय पर नहीं बन पाती है। बिना नहाए-धोए व बगैर नाश्ते के आफिस जाने की मजबूरी है। दरअसल हनुमाननगर के पत्रकारनगर थाने के पास पानी टंकी के सामने दो ट्रांसफार्मरों में एक सोमवार की दोपहर 12 बजे बिगड़ गया। इसके बाद से आसपास के कई घरों में बिजली की आपूर्ति ठप पड़ गयी है।

मंगलवार की शाम तक बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी थी। स्थानीय लोगों ने जब शिकायत की तो शाम में पेसू का मिस्त्री आया। उसने ट्रांसफार्मर ठीक करने की कोशिश की। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। मिस्त्री ने बताया कि इस ट्रांसफार्मर का काम तमाम हो गया है। इससे अब बिजली नहीं मिल सकती है। अब नया ट्रांसफार्मर लगाना होगा।

अगर बड़े साहब लोगों का आदेश होगा तभी जाकर नया ट्रांसफार्मर लगेगा। इस ट्रांसफार्मर से हनुमाननगर के ब्लॉक 9, 11 व 13 के बाशिंदे प्रभावित हुए हैं।

सड़क पर ही फेंक दिए जाते हैं जानवरों के शव

वरीय संवाददाता पटना। जानवरों के शव सड़क पर ही फेंक दिए जाते हैं। यह सिलसिला पिछले कई वर्षो से जारी है। विभागीय अधिकारियों से लेकर राज्य सरकार तक से इसकी शिकायत की गई लेकिन स्थिति जस की तस है। बेली रोड में सगुना के निकट रौशन विहार कॉलोनी है। इसके पास बेली रोड पर बिजली विभाग का ऑफिस भी है।

बिजली ऑफिस के पास ही लोग मरे जानवरों की खाल उतारते हैं और उसका शव सड़क पर ही छोड़ देते हैं। जानवरों के शव से निकलने वाली दरुगंध से रौशन विहार मोहल्ला में रहना मुश्किल हो गया है। इस मोहल्ले में लगभग 60 घर हैं। शव के पास आवारा कुत्ते जमा रहते हैं। इसके कारण पैदल या दो चक्का वाहन से इस रास्ते से गुजरने में काफी परेशानी होती है।

आवारा कुत्ते अब तक दर्जनों लोगों को काट चुके हैं। कुत्तों के कारण मोटरसाइकिल से गिरकर घायल होने की घटना तो लगभग रोज होती है। कुछ माह पहले नगर निगम के अधिकारी ने स्थल निरीक्षण भी किया था और समस्या दूर करने का आश्वसन दिया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यात्री शेड पर अवैध कब्जा

वरीय संवाददाता पटना। राजधानी की विभिन्न सड़कों पर यात्री शेड बनाया गया ताकि लोग वहां खड़ा होकर वाहन का इंतजार कर सकें। लोगों को यह सुविधा भले ही नहीं मिल रही है लेकिन अवैध कब्जा करने वालों की चांदी है। न कोई रोकने वाला और न ही कोई टोकने वाला।

बोलीरोड में चिड़िखाना के निकट बनाए गए यात्री शेड पर अवैध कब्जा कर वहां चाय की दुकान खोल ली गई है। इस वजह से लोगों को तेज धूप में खुले आसमान के नीचे खड़ा होकर बस और टेम्पो का इंतजार करना पड़ता है। शेड पर कब्जा करने वाले उसके सामने यात्रियों को खड़ा भी नहीं होने देते हैं।

हटने में थोड़ी देर हुई तो लोगों को भला-बुरा भी सुनना पड़ता है। दुकान वाले भी कूड़ा-कचरा सड़क पर ही फेंकते हैं। इस वजह से गंदगी भी रहती है। सड़क पर खड़े होकर बस-टेम्पो का इंतजार करने में दुर्घटना की संभावना तो बनी ही रहती है ट्रैफिक जाम की भी समस्या रहती है। सबसे अधिक पेरशानी वृद्ध और बच्चों को होती है। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत प्रशासन से की है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सिटिजन जर्नलिस्ट : डा. रत्नेश चौधरी, एजी कॉलोनीं

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