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नंदीग्राम की वजह से हम हारे: अतुल कुमार

गोरखपुर वरिष्ठ संवाददाता। भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान का मानना है कि नंदीग्राम प्रकरण की वजह से पश्चिम बंगाल में वाम दलों की पराजय हुई। वाम दल इसके सबक को समझ रहे हैं लेकिन इस पराजय पर वामपंथ की शोक धुन बजाने वाले गलतफहमी में हैं।

बढ़ती असमानता और कॉरपोरेट लूट के दौर में वामपंथ की सार्थकता और बढ़ेगी। माध्यमिक शिक्षक संघ के सम्मेलन में शिरकत करने सोमवार को यहां आए अनजान ने ‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल और केरल में वामदलों की पराजय को कई दृष्टि से देखने की जरूरत है। पश्चिम बंगाल में 34 वर्ष के वाम दलों के शासन की कई बड़ी उपलब्धियां हैं, जिन्हें देश ही नहीं विदेश में भी सराहना मिली है।

पश्चिम बंगाल में 13 लाख हेक्टेयर जमीन भूमिहीनों में बांटी गई। उस दौरान कोई साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ जबकि वहां 27 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं। हमने नई आर्थिक नीतियों और नई तकनीक के प्रादुर्भाव के कारण बंगाल में परम्परागत उद्योगों के बंद होने पर औद्योगिक विकास के प्रयास शुरू किए थे कि नंदीग्राम की घटना हो गई। इस घटना ने हमें बहुत नुकसान पहुंचाया।

दूसरी बात यह है कि वहां एक नई पीढ़ी ऐसी है जो होश संभालने के बाद से वाम मोर्चे की ही सरकार देख रही थी। वह सरकार की उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी नकारात्मकता से परिचित थी और बदलाव चाहती थी। इस चुनाव में वाम मोर्चे को 14 प्रतिशत नौजवान वोटों का नुकसान हुआ है। उन्होंने हार का तीसरा कारण वामपंथ विरोधियों का ध्रुवीकरण बताया। अनजान ने कहा कि इस ध्रुवीकरण में कांग्रेस, माओवादी, एसयूसीआई, औद्योगिक घराने से लेकर फिरकापरस्त ताकतें शामिल थीं। ये सब मिलकर हार के कारण बने।

केरल में हमारी हार का मुख्य कारण अच्युतानन्द के नेतृत्व को लेकर एक पखवारे तक सीपीएम का दुविधा में फंसे रहना था। फिर भी हार, हार है और हम इसके लिए कोई बहाना नहीं बना रहे हैं। लेकिन जो लोग इस हार को वामपंथ और विचारधारा की पराजय बता रहे हैं, वे गलतफहमी में हैं। आक्रामक पूंजीवाद से पैदा हो रही सामाजिक, आर्थिक गैरबराबरी के दौर में वामपंथ की सार्थकता और बढेगी, कम नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि इस हार से वामपंथी हताश नहीं हैं। यह एक हल्का झटका है। इससे सबक लेकर आगे बढ़ेंगे। नई परिस्थितियों में वामपंथ का आपसी तालमेल बढ़ाना और ग्रामीण जीवन में किसानों, मजदूरों से घनिष्ठ सम्बन्ध बनाना होगा। मध्यवर्ग की बढ़ती आकांक्षा को समझने की जरूरत है। अमानवीय हो चुके कॉरपोरेट सेक्टर के बरक्स मजबूत कोआपरेटिव सेक्टर का विकास करना होगा। हमें नौजवानों को वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध करने के लिए उनके बीच विचारधारा का अभियान संगठित रूप से चलाने के साथ जातिवाद व धर्मवाद के खिलाफ लोगों को सचेत करना होगा।

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