DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सालभर से बन ही नहीं पाया सिलेबस, अवरोध

वाराणसी कार्यालय संवाददाता। पीएचडी में दाखिले के लिए कोर्स वर्क ऐसी खिचड़ी बन गई है,जो अभी तक पक ही नहीं सकी है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में सालभर से शोधछात्रों के लिए कोर्स वर्क का सिलेबस बन रहा है, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। यह हालत तब है जब इस मुद्दे पर खुद कुलपति की अध्यक्षता में कई बार विभागाध्यक्षों और संकायाध्यक्षों की बैठक हो चुकी है।

यूजीसी के निर्देश के मुताबिक कोर्स वर्क पूरा करने पर ही शोध के लिए पंजीकरण किया जाएगा। इसी निर्देश के मुताबिक शोध अध्यादेश तैयार हुआ। कोर्सवर्क के लिए चार प्रश्नपत्र निर्धारित किए गए। इनमें विषय का पेपर, रिसर्च मेथडोलॉजी, कम्प्यूटर व लघु शोध प्रबंध शामिल था। पिछले साल से ही इस मामले पर विद्यापीठ में ऊहापोह की स्थिति रही। पहले सभी विभागों के लिए समान सिलेबस बनाने की बात थी।

इस पर विभागाध्यक्षों के ऐतराज के बाद सभी विभागों को अपना-अपना सिलेबस बनाने को कहा गया। कुछ दिन पहले फिर हुई बैठक में कुछ विभागाध्यक्षों ने सवाल खड़ा किया कि सिलेबस यूजीसी के मानक के अनुरूप नहीं है। कम्प्यूटर के अलग पेपर का प्रावधान नहीं है। वह रिसर्च मेथडोलॉजी का ही एक पार्ट है। दूसरी आपत्ति थी कि यूजीसी के मानक सिलेबस में लघुशोध प्रबंध का प्रावधान नहीं है। इसके बाद कोर्स वर्क का कोर्स फिर रिवाइज हुआ। कोर्स वर्क के लिए सिर्फ दो पेपर मंजूर हुए।

अब विभाग नए सिरे से कोर्सवर्क का सिलेबस बनाने में लगे हैं। प्रवेश परीक्षा में सफल छात्र-छात्र इधर-उधर का चक्कर काट रहे हैं। प्रवेश परीक्षा नियंत्रक प्रो. नंदलाल का कहना है कि सभी विभागों को प्रवेश-परीक्षा में सफल छात्रों की सूची दे दी गई है। उन्हें यह निर्देश है कि 15 से 20 तक मौखिक परीक्षा करा लें। किसी ने अभी तक अधिकृत रूप से नही बताया है कि वह कब छात्रों को बुला रहे हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सालभर से बन ही नहीं पाया सिलेबस, अवरोध