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मनरेगा में नहीं आ रहा केन्द्र का पैसा, काम ठप

प्रमुख संवाददाता राज्य मुख्यालय। काम की मांग है, योजनाएं हैं, लेकिन पैसा नहीं। लिहाजा पूरे प्रदेश में काम ठप। ग्राम्य विकास विभाग के मुख्यालय में फोन घनघना रहे हैं, आवेदन आ रहे हैं लेकिन सबको टका-सा जवाब दिया जा रहा है कि काम रोक दें। यह हाल है केन्द्र की महत्वाकांक्षी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का।

वर्ष 2011-12 के लिए केन्द्र ने अभी तक एक पैसा भी नहीं दिया है। आला अफसर दिल्ली में पैसा रिलीज कराने के लिए टिके हैं। जानकार सूत्र बताते हैं कि प्रदेश के मुख्य सचिव ने भी भारत सरकार को पत्र लिख कर पैसा जारी न होने पर मनरेगा का काम प्रभावित होने की जानकारी दी है। नए वित्तीय वर्ष को चालू हुए डेढ़ माह से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी तक केन्द्र ने सितम्बर तक के लिए स्वीकृत धनराशि की पहली किस्त नहीं दी है।

पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 1350 करोड़ रुपए बचे थे। अप्रैल व लगभग आधी मई तक उस रकम को खर्च किया गया। लेकिन अब वह धनराशि भी चुक गई है। लिहाजा काम ठप हो चुके हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सितम्बर तक के लिए केन्द्र को लगभग 3663 करोड़ रुपए देने थे। पिछले वर्ष 1350 करोड़ रुपए बचे थे। मनरेगा में बकाया राशि को अगले वित्तीय वर्ष की स्वीकृत राशि से काट लिया जाता है। इसलिए इस राशि को घटा भी दे तो लगभग 2400 करोड़ रुपए की पहली किस्त केन्द्र को जारी करनी थी।

भारत सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक केन्द्र एमआईएस फीडिंग के आधार पर ही पैसा जारी करता है और प्रदेश लगभग 95 प्रतिशत की फीडिंग कर चुका है। वहीं आंध्र प्रदेश जैसे राज्य को पैसा जारी कर दिया गया है जिसके पास पिछले वित्तीय वर्ष का लगभग साढ़े चार हजार करोड़ रुपया बकाया है।

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