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समावेशी विकास के लिए भूमि सुधार जरूरी

हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पटना। उदारीकरण के दौर में भूमि सुधार का मुद्दा पीछे चला गया। इसके कारण ग्रामीण स्तर पर सामाजिक तनाव व हिंसात्मक घटनाएं लगातार बढ़ती चली गई। बिहार जैसे राज्य में भूमि सुधार की समस्या यथावत बनी हुई है। हालांकि बिहार सरकार राज्य में समावेशी विकास के लिए वचनबद्ध है। पर यह तभी संभव होगा जब भूमि सुधार पर गंभीरता से विचार हो और राज्य में रह रहे 11 लाख भूमिहीन पिरवारों को जमीन मिले।

ये बातें पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्रा ने कही। वे अमेरिका की रूरल डेवलपमेंट इन्स्टीटय़ूट व बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान की ओर से आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे। इस दो दिवसीय सेमिनार का विषय था बिहार में ग्रामीण समावेशी विकास के लिए भूमि नीति। उन्होने कहा कि इस सेमिनार में भूमि की समस्या पर चर्चा की जाएगी। साथ ही उन्होने कहा कि किसानों के हित में जमीन अधिग्रहण कानून में बदलाव करने की जरूरत है।

इस मौके पर प्रो.नवल किशोर चौधरी ने कहा कि भूमि सुधार और सामंतवादी मानिसकता खत्म किए बिना कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता। भूमि सुधार जैसे ज्वलंत विषय पर सदन में बहस तक नहीं की जाती। इस मोके पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सिचव डॉ.सी.ए.वर्धन, डॉ.टी.हक, आरडीआई के निदेशक ग्रेगरी रेक, बीआईईएस के निदेशक डॉ.प्यारे लाला, डॉ.जी.प्रसाद आदि मौजूद थे।

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