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ऑनलाइन न हुए तो बंद होंगे सहकारी बैंक

प्रियरंजन पटना। नहीं चेते जिला सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंक तो बंद हो जाएंगी 237 शाखाओं में बैंकिंग। रिजर्व बैंक ने बिना लाइसेंस के बैंकिंग पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। इसके लिए 1 अप्रैल 2012 तक की समय सीमा तय की गई है। बैंकों को ऑनलाइन करने की शर्त भी लगाई है।

इस अवधि में जिन्होंने शर्ते पूरी कर लाइसेंस ले लिया, वह चलेंगे नहीं तो बैंकिंग बंद करना पड़ेगा। राज्य में किसानों का सबसे अधिक कारोबार कोआपरेटिव बैंकों के माध्यम से ही होता है। लेकिन बैंकिंग का लाइसेंस सिर्फ पाटलीपुत्र, नालंदा और वैशाली सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंकों को ही है। शेष जिलों में कोआपरेटिव बैंक वर्षो से बिना लाइसेंस के काम कर रहे हैं।

खास बात यह है कि रिजर्व बैंक की फाइनांसियल स्टेटस की शर्ते अधिसंख्य कोआपरेटिव बैंक की शाखाएं पूरी करती हैं। बावजूद इन शाखाओं में बैंकिंग बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। परेशानी सिर्फ सूचनाओं के आदान-प्रदान और कंप्यूटरीकरण को लेकर है। रिजर्व बैंक ने साफ कह दिया है कि वह उन्हीं शखाओं को बैंकिंग की इजाजत देगा, जहां से उसकी शर्तो के अनुसार सूचनाएं मिलेंगी। इसके लिए हर शाखा को अपनी रिपोर्ट रिजर्व बैंक को रोज उपलब्ध करानी होगी।

किसी भी हाल में आज का लेखा-जोखा कल नहीं स्वीकार किया जाएगा। यह काम तभी संभव होगा जब सभी शाखाओं का कम्प्यूटरीकरण हो जाए। अब तक इन शाखाओं से रिपोर्ट मैनुअली ही भेजी जाती है। कुछ शाखाओं की परेशानी कमजोर आर्थिक स्थिति को लेकर भी है। अब सरकार ने ऐसी शाखाओं को अपनी स्थिति सुधारने के लिए जमा पूंजी बढ़ाने और नन पारफॉरमिंग एकाउन्ट (एनपीए) कम करने की सलाह दी है।

राज्य कोआपरेटिव बैंक को रिजर्व बैंक का लाइसेंस है। सेन्ट्रल कोआपरेटिव बैंकों को भी लाइसेंस मिल जाएगा। ये बैंक तय समय में कंप्यूटरीकृत हो जाएंगे। नबार्ड ने काम शुरू कर दिया है। टेस्टिंग के लिए भो जपुर सेट्रल कोआपरेटिव बैंक को जल्द ही ऑनलाइन कर दिया जाएगा-  रामाधार सिंह, सहकारिता मंत्री

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