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ट्रेनों को बेवजह रोकने से रेलवे को लाखों का चूना

कार्यालय संवाददाता पटना। कारण चाहे कोई भी क्यों न हो। बेवजह ट्रेनों को बीच रास्ते या फिर आऊटर पर रोकने से यात्रियों की फजीहत तो होती ही है साथ ही साथ रेलवे को प्रतिदिन लाखों रुपए का चूना भी लगता है। ट्रेनों को कभी सिग्नल नहीं मिलने, प्लेटफार्म नहीं खाली होने तो कभी किसी मांग को लेकर ट्रेनों को रोक दिया जाता है।

कुछ भी हुआ ट्रेन रोक दो। यात्रियों की माने तो प्रदर्शनकारियों द्वारा ट्रेन रोकने की घटनाएं तो होती ही हैं वहीं किसी ट्रेन को पहले पास कराने या प्लेटफार्म खाली नहीं होने से अक्सर ट्रेनों को घंटों किसी स्टेशन पर शंट करके रख दिया जाता है। यदि बेवजह ट्रेनों के ठहराव को कंट्रोल कर दिया जाय तो रेलवे को शायद इतना बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़े और यात्रियों की फजीहत भी नहीं होगी।

वैसे रेलवे सूत्रों की माने तो प्लेटफार्म की संख्या बढ़ा दी जाय, चेनपुलिंग, प्रदर्शन से निजात मिल जाय तो यात्रियों की यात्राा भी सुगम हो जाएगी और रेलवे को लाखों का घाटा भी नहीं उठाना पड़ेगा। वैसे रेलवे एक इंजन के लिए छह से सात हजार और एक कोच के लिए कम से कम एक हजार रुपए प्रति घंटे के हिसाब से होल्डिंग चार्ज लेती है। यानी किराए पर इंजन या कोच लेनी हो तो रेलवे प्रति घंटे के हिसाब से इतने पैसे चुकाने होंगे।

पटना होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनों को छोड़ दिया जाय अधिकांश ट्रेन को किसी न किसी कारण से लेट ही जंक्शन पहुंचती है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि रेलवे को हर रोज कितने रुपए का चूना लग रहा है।

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