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बिजली की गारंटी नहीं, टैरिफ दुगुना करना ठीक नहीं

वरीय संवाददाता पटना। बिजली की गारंटी नहीं है। एक या दो घंटे की बिजली भी सुनिश्चित नहीं है। ऐसे में बिजली दर (टैरिफ) दुगुना करना उचित नहीं है। इससे घरेलू, व्यावसायिक व औद्योगिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पडेगा। बिजली बोर्ड के बिजली दर बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग में सोमवार से जनसुनवाई शुरू हुई।

आयोग के अध्यक्ष यूएन पंजियार, सदस्य आरएन शर्मा व एसएम सहाय के समक्ष विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी बातें रखते हुए बोर्ड के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयोग से आग्रह किया कि वह बोर्ड के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति नहीं दे।

घरेलू उपभोक्ताओं के एक प्रतिनिधि डोमन सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि पटना व शेष बिहार के लिए अलग-अलग टैरिफ क्यों? क्या पटना को अधिक बिजली मिलती व शेष बिहार को कम इसलिए। एक तरह की टैरिफ ही होनी चाहिए। घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली पर सौ फीसदी वृद्धि का कोई आधार नहीं है। कहीं 250 फीसदी तक की वृद्धि तो कहीं दस फीसदी की ही।

प्रो. प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि आम उपभोक्ताओं के साथ व्यापारी जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। आयोग आम उपभोक्ताओं के हित में फैसला ले। देहातों में जहां शादी-ब्याह के मौके पर भी बोर्ड लोगों को रोशनी मुहैया नहीं करा पाता है वैसे में उनसे बिल की वसूली करना जायज नहीं है। एक-दो घंटे की बिजली की भी गारंटी नहीं है। बिजली की उपलब्धता के हिसाब से बिलिंग होनी चाहिए।

लगभग 40 फीसदी ट्रांसमिशन लॉस पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि आयोग इस पर अपनी सहमति नहीं दे। ऐसा हुआ तो बोर्ड का हाल भी कहीं टेलीफोन विभाग जैसा न हो जाए। उनकी राय में अगर बोर्ड द्वारा अच्छे तरीके से मीटरिंग व बिलिंग की जाए तो मौजूदा टैरिफ में ही राजस्व को बढ़ाया जा सकता है। बोर्ड ने आयोग के समक्ष अपनी राजस्व की जरूरत को बढा-चढाकर पेश किया है।

उद्यमी केपीएस केशरी की राय में इससे उद्योग धंधे चौपट हो जाएंगे। लघु उद्यमी डा. मोहन सिंह ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज करायी। इसके पहले बोर्ड के परामर्शी व अधिकारियों ने बोर्ड के राजस्व की जरूरत व टैरिफ वृद्धि के प्रस्ताव पर विस्तार से अपनी बातें रखीं।

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