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सूबे में नई औद्योगिक नीति जल्द

पटना, हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने वाली औद्योगिक नीति जल्द सामने आयेगी। इसमें अत्याधुनिक उद्यमों के साथ परम्परागत और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। शुक्रवार को औद्योगिक नीति 2011 के प्रारूप की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नीति के कार्यान्वयन में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया।

नयी नीति में औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन और बैंक कर्ज दिलाने की जिम्मेदारी डीएम को सौंपी गयी है। राज्य में अब तक लगभग सवा दो लाख करोड़ रुपये पूंजी निवेश के 461 प्रस्ताव मंजूर किये जा चुके हैं। इनमें से लगभग दो हजार करोड़ रुपये की 149 परियोजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं।

वर्ष 2006 में तैयार नीति से बिहार में पूंजी निवेश की प्रक्रिया शुरू हुई। अब पुराने कानून में परिवर्तन की जरूरत महसूस की जा रही है। औद्योगिक नीति 2011 में हरेक जिले में कम से कम एक परम्परागत उद्योग को कलस्टर के रूप में विकसित करने की योजना है। हर वर्ष एक हजार एकड़ जमीन का औद्योगिक उपयोग के लिए अधिग्रहण किया जायेगा।

साथ ही औद्योगिक इकाइयों को कर्ज दिलाने के लिए उद्योग विभाग भारतीय रिजर्व बैंक के मानकों के अलावा, अपने मापदंड तैयार करेगा। डीएम की अध्यक्षता में विभागीय और बैंक अफसरों की टीम आवेदनों की जांच करेगी। बैठक में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, उद्योग मंत्री रेणु कुमारी आदि शामिल हुए।

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