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कहीं ‘भट्टा पारसौल’ न बन जाए कल्पीपारा

बहराइच अजय त्रिपाठी। ग्रेटर नोएडा के भट्ठा गांव की तर्ज पर बहराइच के कल्पीपारा गांव में भी नफरत की चिन्गारी सुलग रही है। यहाँ के 50 किसानों की 478 बीघा कृषि योग्य भूमि आवास विकास परिषद के लिए अधिग्रहीत की जा रही है। किसानों का कहना है कि इसके ठीक बगल में बंजर भूमि है इसके लिए उस जमीन को लिया जा सकता है।

वहीं इस मामले में बहराइच के मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) रवीन्द्र कुमार का कहना है कि यह मसला सीधे लखनऊ से डील हो रहा है। शहर के उत्तरी किनारे पर बसे कल्पीपारा गांव में आवास विकास परिषद के तहत आवास बनाए जाने हैं। इस गांव में पॉलीटेक्निक के निकट 50 किसानों की कृषि योग्य भूमि पर राजस्व विभाग के अफसरों की निगाह लगी है।

प्रभावित किसानों का कहना है कि इसी जमीन से सटा एक विशाल भूखण्ड बंजर की शक्ल में है यदि इस जमीन का उपयोग आवास विकास परिषद अपने इस्तेमाल में ले ले तो बंजर भूमि में आबादी बसेगी साथ ही कृषि पर निर्भर किसानों के परिवार में रोटी का संकट भी नहीं रहेगा।

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