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एक दूसरे को बचाने में गंगा में समाए चार किशोर

निज संवाददाता रामनगर/वाराणसी। सामने घाट के सामने उभरी रेत शुक्रवार की सुबह चार मौतों का गवाह बनी। कराटे सीखने के बाद यहां नहाने पहुंचे किशोर एक दूसरे को बचाने में डूब गए। स्थानीय मल्लाहों ने घंटों मशक्कत के बाद एक-एक कर चारों शवों को गंगा से निकाला।

परिवारजनों के करुण क्रंदन से पूरा महौल गमगीन हो गया था। हाईस्कूल की परीक्षा समाप्त होने के बाद छुट्टियों का सदुपयोग करने के लिए रामनगर के बघेली टोला निवासी सूरज मौर्य, मछरहट्टा निवासी करन व दीपक गुप्त, कराटे की ट्रेनिंग ले रहे थे। सभी की उम्र लगभग 15 से 16 वर्ष के बीच थी। इनके साथ ही पढ़ाई छोड़ चुके साहित्यना का निवासी आसिफ व अन्य दर्जन भर किशोरों को स्थानीय संदीप कराटे के जरिए आत्मरक्षा के गुर सिखाता था।

सप्ताह के अन्य दिन तो वह पंचवटी स्थित क्लब में प्रशिक्षण देता था लेकिन प्रत्येक शुक्रवार को सामने घाट के सामने गंगा में उभरी रेत पर हार्ड ट्रेनिंग के लिए लाता था। शुक्रवार की सुबह सभी ट्रेनिंग के बाद वापसी की तैयारी कर रहे थे तभी सूरज, करन, दीपक ने गंगा में नहाने का मन बनाया।

आसिफ नहाने नहीं सिर्फ घूमने के लिए उनके साथ गया। नहाने के दौरान सूरज गहरे पानी में चले जाने के कारण डूबने लगा तो करन बचाने पहुंचा लेकिन वह भी डूबने लगा। दीपक ने दोनों को बचाने की कोशिश की लेकिन खुद फंस गया। आसिफ भी साथियों को बचाने की गरज से कपड़े पहने ही पानी में कूद गया।

किसी को तैरना नहीं आता था इसलिए सभी गंगा में समाते चले गए। किशोरों को डूबते देख वहां मौजूद कोच व अन्य बच्चों ने हल्ला गुहार शुरू कर दिया। किशोरों के परिवारों को और पुलिस को भी घटना की जानकारी हुई। रामनगर के अशोक साहनी, रमेश साहनी, प्रहलाद, मुन्नु सहित एक दर्जन नाविक गोताखोरों ने तीन घंटे के प्रयास के बाद किशोरों का शव गंगा से निकाला।

पंचनामा न कराने के लिए परिजनों ने दबाव बनाया तो पुलिस से हल्की नोकझोंक भी हुई। पोस्टमार्टम के बाद शाम को शव लेकर परिजन रामनगर पहुंचे तो शोक की लहर दौड़ गयी। करन के बहन की शादी 28 मई को होनी है।

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