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सिविल सेवा में सफल रहा बांका का लाल

बांका कार्यालय प्रतिनिधि। भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2010 के परिणाम बांका जिले के अत्यंत सुखद रहा। देश की इस सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सेवा परीक्षा में बांका जिले के एक लाल ने 10 वां स्थान प्राप्त कर देश भर में जिले का मान बढ़ाया।

यह लाल है जिले के अमरपुर प्रखंड अंतर्गत ओड़ैय गांव के प्रकाश चंद्र घोष तथा शोभना घोष का पुत्र आलोक रंजन घोष। आलोक फिलहाल दिल्ली में है। इससे पहले वर्ष 2009 में वे भारतीय वन सेवा के लिए भी चयनित हो चुके हैं।

इस परीक्षा में उन्हें 23वां स्थान मिला था। भारतीय प्रशासनिक सेवा परीक्षा में सफलता उन्हें दूसरे प्रयास में मिली। वे एमबीए तथा पशु चिकित्सा विज्ञान में स्नातक हैं। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के अलावा अपने माता-पिता एवं दादा स्व. गुरेश मोहन घोष ‘सरल’ के आशीर्वाद को दिया है।

आलोक के पिता प्रकाश चंद्र घोष भारतीय वायु सेना में मास्टर वारंट ऑफिसर हैं। वे फिलहाल बागडोगरा में पदस्थापित हैं। वे कहते हैं कि आलोक की शिक्षा-दीक्षा प्राय: बाहर ही हुई। चाचा जीवन कुमार घोष ने बताया कि आलोक की आरंभिक शिक्षा-दीक्षा केन्द्रीय विद्यालय चेन्नई में हुई। यहीं से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उच्च अंकों के साथ पास की।

इंटरमीडिएट की परीक्षा उन्होंने हासिमारा, असम में पास की। इसके बाद वे पशु चिकित्सा महाविद्यालय, चेन्नई में दाखिल हुए और 2005 में वहां से डिग्री हासिल की। 2007 में उन्होंने सिंबॉयोसिस पुणे से एमबीए की डिग्री हासिल की। वर्तमान में वे वर्धमान (प.बंगाल) में एसबीआई इंश्योरेंश के पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

इस पद पर रहते हुए उन्होंने वर्ष 2009 में भारतीय वन सेवा की परीक्षा में 23वां स्थान प्राप्त किया। इसकी ट्रेनिंग करते कि उन्हें 10वें रैंक के साथ भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफलता की खुशखबरी मिली। दिल्ली से उन्होंने यहां अपने परिवार वालों को यह सूचना दी।

सूचना पाकर न उनके परिवार और गांव बल्कि जिले भर के लोग खुशी से झूम उठे।उपलब्धिबांका के ओड़ैय गांव निवासी आलोक कुमार घोष को 10वें रैंक के साथ सिविल सेवा परीक्षा में मिली सफलताइससे पहले उन्हें भारतीय वन सेवा परीक्षा 2010 में भी 23वें रैंक के साथ मिली थी।

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