DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अर्थ के विभिन्न अर्थों की पड़ताल

1)  अर्थ के विभिन्न अर्थों की पड़ताल
कहते हैं पैसे का रंग एक सा ही होता है, लेकिन एक सच यह भी है कि उसके असर सबके लिए अलग-अलग होते हैं। प्रस्तुत उपन्यास मूलत: इसी द्वंद्व की पड़ताल करता दिखता है। एक व्यक्ति समूचे समाज की न्यूनतम इकाई होता है और अचानक आने वाले पैसे के उस पर पड़ने वाले असर का अंतत: समाज की बुनावट पर पड़ता है। उपन्यास का कथानक इन्हीं अच्छे-बुरे असर का लेखा-जोखा देने के प्रयास में कई जाने-अनजाने पहलुओं को खंगालने का प्रयास करता है जिनसे कमोबेश रोजमर्रा के जीवन में सभी का साबका पड़ता है। लेखिका की शैली विशेष तौर पर ध्यान खींचती है जो सीधी-सरल होने के साथ-साथ किरदारों के माध्यम से एक खास किस्म की रूमानियत को भी अपनी हद में लेकर चलती है। यही वजह है कि कथा में रोचकता का पुट बना रहता है और एक जाने-पहचाने विषय में भी नवीनता का अहसास होता है। कहना न होगा कि ‘अर्थचक्र’ की चिंताओं के केंद्र में मानवीय संबंध हैं।
अर्थचक्र, लेखिका: शीला झुनझुनवाला, प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन, मूल्य : 200 रु.

2) जनसंघर्ष के मसीहा की कहानी
अन्ना हजारे का नाम अब देश के नागरिकों के लिए अनजाना नहीं रहा। एक समय महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार की मुहिम में अनेक तख्ते हिलाने के बाद लोकपाल बिल पारित कराने के लिए दिल्ली में उनकी भूख-हड़ताल का गहरा असर दिखा। पुस्तक सबके प्यारे अन्ना की संक्षिप्त जीवनगाथा के साथ-साथ उनकी सोच और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी अथक यात्रा और उनके दोस्तों-दुश्मनों के बारे में भी बुनियादी जानकारी प्रदान करती है। महात्मा गांधी के देश में उनके मार्ग पर चलने का व्यावहारिक हौसला बहुत ही कम लोग दिखा पाए हैं, लेकिन अन्ना द्वारा सत्य के इस मार्ग पर चल कर सामाजिक न्याय की अलख जगाना और कई मोर्चो पर जीत हासिल करना एक अनोखी उपलब्धि रही है। अन्ना के हालिया आंदोलन के पीछे की कहानी, इससे जुड़े खासोआम, उनकी सोच और खुद लोकपाल बिल के जरूरी बिंदुओं पर जानकारी पुस्तक को सहज ही आम पाठक  की पसंद के दायरे में ले आती है।
क्रांतिदूत अन्ना हजारे, लेखक : सुदर्शन भाटिया, प्रकाशक: डायमंड बुक्स, ओखला, नई दिल्ली, मूल्य : 95 रुपए

3) शब्दों का अतीत, वर्तमान और भविष्य
मानव संबंधों में शब्दों के बिना विचार संप्रेषण की बात सोची भी नहीं जा सकती। हाल के एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार भी भाषा का पहला चरण इनसान के पूर्वज नियंडरथल ने लाखों वर्ष पूर्व रखा था। प्राचीन काल से लेकर आज तक के सफर के दौरान भाषा उत्पत्ति के विभिन्न चरणों का गंभीर अध्ययन कोश में मिलता है। विभिन्न सभ्यताओं की भाषिक साम्यता कितनी गहरी रही है, सहज ही पता चलता है। इसके अनेक उदाहरण सशक्त प्रमाणों के साथ यहां मौजूद हैं। सच तो यह है कि दुनिया की दूर-दराज की भाषाओं की साम्यता चौंकाने वाली है, जिससे अहसास एकबारगी फिर से पुख्ता होता है कि मानव सभ्यता के बुनियादी चरण करीब-करीब एक ही दिशा, सोच-विचार और प्रकृति संबंधी लगभग समान अध्ययन के साथ धीरे-धीरे पड़े थे, उनमें फर्क केवल देशकाल की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हुआ था। कोश में हिन्दी शब्दों का गहन विवेचन मौजूद है।
शब्दों का सफर, लेखक: अजित वडनेरकर, प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन, दिल्ली, मूल्य : 600 रुपए  

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अर्थ के विभिन्न अर्थों की पड़ताल