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अब प्रोजेक्ट शिक्षाकर्मियों के बेटे-बेटियों ने मांगी इच्छामृत्यु

संवाददाता रांची, अब प्रोजेक्ट शिक्षाकर्मियों के बेटे-बेटियां को पापा का कष्ट बर्दाश्त नहीं हो रहा। सीएम के नाम मार्मिक पत्र भेजकर इच्छामृत्यु देने की मांग की है। इसकी शुरुआत बोलवा सिमडेगा के शिक्षक शुभाशीष चटर्जी की पुत्री श्रेया ने की है।

सीएम के नाम लिखा पत्र महासचिव अरशद इमाम को मिल गया है। इसमें साफ है कि सीएम अंकल, बस इच्छामृत्यु दे दें..। महासचिव अरशद इमाम ने बताया कि अन्य प्रोजेक्ट शिक्षाकर्मी के बेटे-बेटियों की फरियाद मिलने के बाद सामूहिक रूप से सीएम को सौंपा जायेगा।

सेवा समंजन की मांग को लेकर प्रोजेक्ट शिक्षाकर्मी राजभवन के सामने विगत 57 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। इस बीच प्रोजेक्ट शिक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति के नाम खुला पत्र भेजकर दुर्दशा की कहानी के साथ इच्छामृत्यु मांगी है।

वर्ष 1984-85 में राज्य में 87 प्रोजेक्ट स्कूल खुले थे। इसके बाद से सेवा समंजन की लड़ाई लड़ रहे हैं। अब तक उन्हें एक पाई का भुगतान तक नहीं हुआ है। मजेदार है कि बिहार ने कोर्ट के निर्देश के आलोक में सेवा समंजन पिछले साल ही कर लिया।

झारखंड की कमेटी ने 95 फीसदी की सेवा को अमान्य कर दिया है। शिक्षाकर्मियों का कहना है कि तिल-तिल कर मरने से अच्छा है कि एक साथ सपरिवार मौत के काल में समा जाएं। चूंकि आत्महत्या या आत्मदाह करना अपराध की श्रेणी में है, इस कारण शिक्षाकर्मियों ने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु देने की मांग पहले ही की थी।

कहा कि राष्ट्रपति शासन में उनके सपने टूटे हैं। फैक्टभ् प्रोजेक्ट स्कूल-87, कार्यरत शिक्षाकर्मी 1044भ् नाइट गार्ड, खेती और मजदूरी करते हैं शिक्षक। भ् उच्चस्तरीय कमेटी ने 95 फीसदी का दावा को फर्जी माना। भ् दो दर्जन से ज्यादा पढ़ाते-पढ़ाते मर गये। राजभवन के सामने 57 दिन से कर रहे हैं अनशन।

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