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500 से ज्यादा विवि शिक्षकों के छठे वेतनमान पर संशय अस्वीकृत

दीपेश कुमार रांचीराज्य के 500 से ज्यादा शिक्षक छठे वेतनमान से वंचित हो सकते हैं। इनमें नवांगीभूत कॉलजों के ही 371 शिक्षक हैं, जिनके पद सृजन को सरकार ने दिसंबर 2008 में मंजूरी दी है। इनमें से 210 शिक्षक रांची विश्वविद्यालय के लिए थे। इसके अलावा विभिन्न कॉलेजों में 125 से ज्यादा शिक्षक अस्वीकृत पदों पर कार्यरत हैं। इनमें से आधे नवनियुक्त शिक्षक हैं, जिन्हें विश्वविद्यालयों द्वारा अस्वीकृत पदों पर पदस्थापित किया गया है। यूजीसी के नॉर्म्स के अनुसार मार्च 2006 तक स्वीकृत पदों को ही छठे वेतनमान का लाभ दिया जा सकता है। इसके बाद के सृजित पदों पर कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति-प्रोन्नति आदि की जांच के बाद छठा वेतन मिल सकता है। इससे अस्वीकृत पदों पर कार्यरत शिक्षक परेशान हैं। दरअसल विश्वविद्यालयों ने पहुंचवालों को मनमाफिक कॉलेज दिलाने के लिए अस्वीकृत पदों पर ही पदस्थापित कर दिया। बिना पैरवीवाले कई शिक्षकों को ग्रामीण इलाकों में अस्वीकृत पदों पर भेजा गया। इसके अलावा 1982 में सिर्फ रांची विवि में 280 शिक्षकों की नियुक्ति कुलपति स्तर पर की गई थी। इनमें से ज्यादातर अस्वीकृत पदों पर पदस्थापित किए गए। बाद में नियम-परिनियम की अवहेलना कर ऐसे शिक्षक रिटायर होनेवाले शिक्षकों के स्वीकृत पद पर पदस्थापित किए जाते रहे। स्वीकृत पद पर पदस्थापित करने का प्रावधान नहींनियमानुसार किसी भी रिक्त स्वीकृत पद पर किसी को अस्वीकृत पद से सीधे पदस्थापित नहीं किया जा सकता, परंतु राज्य के विश्वविद्यालयों में नियमों की धज्जिया उड़ती रहीं। अब भी चार दर्जन से ज्यादा शिक्षक ऐसे बच गए हैं, जो स्वीकृत पद पर नहीं है। दिलचस्प बात है कि उन्हें अब तक नियमित रूप से वेतन भुगतान भी होता रहा है, जबकि सरकार से किसी भी अस्वीकृत पद के लिए वेतन राशि नहीं मिलती।

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