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भारत रहे सतर्क

भारत-चीन के रिश्तों में हमें केवल सतही चीजों को जान कर उछलना नहीं चाहिए। जहां तक पाक अधिकृत कश्मीर में चीनी सैनिकों की मौजूदगी का सवाल है, तो उसके पीछे का सच यह है कि उस इलाके में पाक और चीन को मिलाने वाली सड़क बनाई जा रही है। ये सड़क दरअसल चीन के इंजीनियरों ने ही बनाई है।

यह पहाड़ी इलाका है और यहां की आबादी कम है। संभवत: इस सड़क के जरिए चीन, पाकिस्तान  के साथ अपना व्यापार बढ़ाना चाह रहा है। वैसे तो चीन हर तरफ अपनी सड़कों और रेलवे का विस्तार कर रहा है, लेकिन इस सड़क को लेकर हमें सावधान हो जाना चाहिए।

मेरे खयाल से हमें इस चीज को रणनीतिक नजरिए के साथ ही व्यापारिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है। फिलहाल जब चीन के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते आगे बढ़ रहे हैं तो हमें यह भी देखना पड़ेगा कि पाक के साथ चीन के व्यापारिक रिश्ते किस तरह से विकसित हो रहे हैं।

जहां तक अरुणाचल प्रदेश के अधिकारी को अलग तरह का वीजा जारी करने की बात है तो यह पहले से स्पष्ट है कि चीन, अरुणाचल को भारत का हिस्सा नहीं मानता है। 1962 की लड़ाई के पीछे के मुद्दों में भी यह मामला शामिल था। हां, इसका समय देखना चाहिए।

सच्चाई यह है कि अरुणाचल के बार्डर पर आज चीन की पोजीशन 8-10 साल पहले की तुलना में ज्यादा सख्त हो रही है। इसे लेकर भी भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। कश्मीर के लोगों को अलग से वीजा जारी करने का मुद्दा भी पुराना है।

ऐसे में, मुझे चीन की सख्ती तो समझ में आती है लेकिन इसकी टाइमिंग को समझना मुश्किल है। हो सकता है कि इसके पीछे उसके आंतरिक दबाव काम कर रहे हों, लेकिन निश्चित तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता ।
प्रस्तुति : दीपक भारती

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