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फारबिसगंज में डेंगू ने पसारा पांव

बरसात का मौसम अंतिम पड़ाव पर है। अब मच्छरों के प्रकोप से इस क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में डेंगु भी पांव पसार चुका है। प्रशासन और डॉक्टर की लापरवाहीं से कितने मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है।

डेंगु एक संक्रामक रोग है जो क्यूलिकस मच्छरों से फैलता है। डेंगु का बायोलोजिकल नेम फैलभिरियस है। इसकी पहचान सेसोटाईप से की जाती है। डेंगु ग्रसित रोगी के लक्षण रोगी को शरीर और हड्डियों में जोड़ का दर्द होना, दर्द सबसे पहले हाथ की अंगुलियों में ज्यादा होता है तथा एक जगह से दूसरी जगहों पर हट-हट कर होता है।

हड्डियों के जोड़ों में ज्यादा दर्द रहता है। डेंगु बुखार रहने पर रोगी को पांच से आठ दिन के अंदर चमड़े पर खसरे के जैसा दाने भी निकल आते है। जीभ का स्वाद बहुत बिगड़ जाता है कुछ खाते पीते नहीं बनता है। रोगी को भूख भी कम लगती है। बुखार 103 डिग्री से 105 डिग्री तक होता है। रोगी को पसीना अतिसार, नगसीर कान के पास सुजन भी होता है। डेंगु रोग से बचने का उपाय साफ-सफाई का ध्यान रखना, घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना, पानी की टंकी को प्रत्येक 15 दिनों पर साफ करना, रात में मच्छर दानी लगाकर सोना, घर के आसपास दवा का छिड़काव करना।

डेंगु मच्छर की पहचान इस संबंध में अस्पताल रोड स्थित डा मानव महेश ठाकुर कहते है कि यह मच्छर आम मच्छरों से बड़े होते है। इसके पंख पर स्पोट होते है। यह विशेषकर सुबह या शाम में सक्रिय होते है। यह मच्छर ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ सकता। डेंगु फिवर को हेमोहेजिक फिवर भी कहते हैं।

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