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तीस हजार कॉपियों की दुबारा जांच पूरी

बिहार विद्यालय परीक्षा सिमित ने कहा कि 30 हजार कॉपियों की दुबारा जांच लगभग पूरी हो चुकी है। इस बार मैट्रिक की परीक्षा में करीब 41 हजार छात्रों ने अपनी कॉपियों की पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। इसमें से दो हजार कॉपियों में त्रुटियां पाई गई हैं इसिलए इनकी जांच संभव नहीं है।

त्रुटियों में मुख्य रूप से क्रमांक संख्या का उल्लेख नहीं है। मतलब अब नौ हजार कॉपियों की जांच बाकी है। बोर्ड का कहना है कि इस बार अबतक की मैट्रिक परीक्षा के इतिहास में सबसे ज्यादा पुनर्मूल्यांकन के आवेदन आए हैं। इसका कारण यह भी है कि जहां 2009 में आठ लाख 85 हजार विद्यार्थी मैट्रिक की परीक्षा में शामिल थे वहीं 2010 में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 10 लाख हो गई।

2009 की परीक्षा में 26 हजार छात्रों की 36 हजार कॉपियां पुनर्मूल्यांकन के लिए आई थीं। बोर्ड पर यह आरोप लग रहे हैं कि स्क्रूटनी में देर हो रही है। लेकिन बोर्ड का कहना है कि हमारे यहां काम करने वालों का पर्याप्त अभाव है। और दूसरी ओर कॉपियों की जांच तो शिक्षक ही करते हैं। लेकिन शिक्षक तो राज्य में केवल पठन-पाठन कार्य के लिए हैं नहीं। इन्हें जनगणना, से लेकर चुनाव तक में झोंका जाता है।

जाहिर है जो काम समय पर होने चाहिए वह कई बार नहीं हो पाते हैं। बोर्ड ने कहा कि हम चाहेंगे कि हर हाल में सितंबर तक पुनर्मूल्याकन के काम पूरे कर छात्रों को अंक पत्र प्रदान कर दिए जाएं। बोर्ड ने कहा कि यहां किसी भी छात्र करियर को ज्यादा नुकसान होने जैसी बात नहीं है क्योंकि जिंन छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन दिया है लगभग सभी ने कॉलेजों में प्रवेश ले लिया है।

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  • Web Title:तीस हजार कॉपियों की दुबारा जांच पूरी