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सारा इलज़ाम तो आईसीसी के सिर ही मढ़ा जाएगा!

लंदन स्थित लार्डस के मैदान को क्रिकेट  का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, परंतु वहां हाल ही में हुई मैच में स्पॉट फिक्सिंग की घटना ने क्रिकेट में सट्टेबाजी की बड़ी भूमिका का खुलासा किया है। यही नहीं प्रारंभिक खुफिया जांच में खिलाड़ियों के कमरे से अच्छी खासी रकम भी बरामद की गई है।

इस खेल में खिलाड़ियों की अनुशासनहीनता, अंपायर पर उंगली उठाना और चकिंग जैसे मामलों ने इस लोकप्रिय खेल की छवि को धूमिल किया ही था, अब स्पॉट फिक्सिंग ने तो क्रिकेट की इज्जत पर पूरी तरह कालिख ही पोत दी है। इतिहास पर जाएं तो 1932-33 में बॉडी लाइन विवाद, 1977-78 में कैरी पैकर द्वारा विद्रोही श्रृंखला का आयोजन, दक्षिण अफ्रीका में आईसीसी के नियमों का उल्लंघन कर इंग्लैड और वेस्टइंडीज (डर्टी डजन) के खिलाड़ियों का वहां खेलना, वहां की रंगभेद नीति को मान्यता प्रदान करना था।

ऐसी पहली घटना 1994 में हुई थी, जब आस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ और नामी  स्पिनर शेन वार्न ने सटोरिये को मैच के दौरान पिच और मौसम के बारे में अहम जानकारी देने के लिए अचछी खासी रकम अपनी जेब में डाली थी। इस पर अधिकारियों के कानों पर कोई जूं नहीं रेंगी। उधर 1990 के दशक के अंत में दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए, हर्शल गिब्स , निकी बोई और पीटर स्ट्रइडम को मैच फिक्सिंग से धन कमाने के आरोप में प्रतिबंधित किया गया था। क्रिकेट में भ्रष्टाचार का तब यह सबसे बड़ा मामला था।

इस झमेले के तुरंत बाद अजहर, जडेजा मनोज प्रभाकर और अजय शर्मा पर ऐसे मामले में आजीवन अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने से वंचित किया गया था। लेकिन क्रिकेट को बाजारू बनाने में सबसे बड़ी भूमिका पाकिस्तानी खिलाड़ियों की ही रही है। वैसे क्रिकेट के बड़े बखेड़ों का अखाड़ा शारजाह प्रतियोगिता भी रही है। यही धरती सटोरियों के लिए सबसे उपजाऊ सिद्ध हुई।

इसके अलावा 2003 में शेन वार्न और 2006 की चैंपियन्स ट्राफी मुकाबले में पाकिस्तान के शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ को ड्रग सेवन का दोषी पाया गया। सन 2000 में क्रिकेट को भ्रष्टाचार और फिक्सिंग जैसी तोहमत से बचाने के लिए आईसीसी ने एंटी करप्शन सिक्योरिटी यूनिट (एसीएसयू) का गठन किया था, जिसने ड्रेसिंग रूम में मोबाइल पर बात करने तक पर रोक लगा दी। इसके बाद बाहरी लोगों से बात कैसे होती है? जो भी हो  सारा दोष तो आईसीसी पर ही मढ़ा जाएगा क्योंकि क्रिकेट की रखवाली करने वाली यह संस्था ही खिलाड़ियों की अपराधी करतूतों पर परदा डालती रही है, जिसका दुष्परिणाम पूरा क्रिकेट जगत और क्रिकेट प्रेमी भुगत रहे हैं।

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