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गंडक को मूल रास्ते पर लौटाने की कसरत

बेतिया में गंडक नदी की मुड़ी धारा को मूल रास्ते पर लौटाने की कसरत 72 घंटे के बाद भी जारी है। जल संसाधन विभाग के आला अधिकारियों के साथ-साथ इंजीनियर तटबंध को बचाने की कसरत में जुटे हैं। विभाग के इंजीनियर दिन-रात मरम्मत कार्य में लगे हुए हैं।

विभाग ने तटबंध को लेकर इंजीनियरों को हाई अलर्ट कर दिया है और उन्हें पूरे तटबंध पर निगरानी को कहा गया है। हालांकि स्थिति को नियंत्रण में बताया गया है। तटबंध की लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है।

आस-पास के क्षेत्र में सुरक्षा चौकसी बढ़ा दी गई है। बेतिया जिले के पिपरा-पिपरासीघाट के बीच में भीतहा रिटायर्ड लाईन पर गंडक नदी ने सोमवार की रात अचानक टर्न ले लिया और तटबंध पर लगभग 25 मीटर के क्षेत्र में भारी दबाव बना लिया।

नदी तटबंध की ओर स्लोप के आगे एप्रन के बाद के सरफेस पर लगातार तेज दबाव बनाने लगा। इससे तटबंध पर भारी खतरा उत्पन्न हो गया। मंगलवार को जल संसाधन मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव मंगलवार के साथ विभाग के प्रधान सचिव अजय वी नायक ने घटनास्थल का दौरा भी किया था।

उधर इंजीनियर इन चीफ (उत्तर) राजेश्वर दयाल घटनास्थल पर ही कैम्प कर रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में किसी स्तर पर कोई चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गंडक नदी की धारा ने वर्ष 2008 में नेपाल के कुसहा के निकट कोसी की धारा मुड़ने की याद को फिर ताजा कर दिया। अगस्त में ही कोसी ने कुसहा में अपनी धारा मोड़ ली थी और उत्तर बिहार में भारी तबाही मची थी।

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