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कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी

पटना। सरकार के फैसले से दीघा के किसान दुखी हैं। उनका कहना है कि वे अपनी जमीन पर खेती कर बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। कई किसानों ने इसी जमीन के भरोसे बेटी की शादी भी तय कर दी है।लालदेव राय: एक बीघा जमीन है जिसपर खेती करते हैं। दो बच्चाी और आठ लड़के हैं। इसी जमीन पर खेती कर परिवार का खर्चा चलाते हैं। सुंदर राय: छह कट्ठा जमीन आवास बोर्ड में पड़ता है। इसी जमीन के भरोसे हैं। इस पर आलू और प्याज की खेती कर बाजार में बेचते हैं। कुछ पैसे मिल जाते जिससे जीविका चलती है। देवनारायण राय:16 कट्टा जमीन है। मेरी एक लड़की है जिसकी शादी करनी है। इसी जमीन पर सब्जी उपजा कर घर चलाते। दूसरी कोई जमीन नहीं है। हम अपनी जमीन को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। श्याम देव राय: मेरे तीन बच्चों हैं। एक बिगहा जमीन है, जो आवास बोर्ड में पड़ता है। मेरे पास दूसरा कोई धंधा नहीं है। बाप-बेटे मिलकर इसी जमीन पर खेती कर जीवन यापन करते हैं। हमारी जमीन है तो दूसरा कौन होता है खरीब-बिक्री करने वाला। सरकार ने ऐसा किया तो हम अपनी जान दे देंगे।लाल बाबू राय: हम अपनी जमीन को किसी भी कीमत पर आवास बोर्ड के साथ खरीद-बिक्री नहीं करेंगे। इसके लिए चाहे जो हो। शंकर राय: चार कट्ठा जमीन है। मेरी जमीन का कागज मेरे पास है और मालिक आवास बोर्ड बनता है। यह कहां की बात है। हम अपनी जमीन पर खेती करते हैं तो पुलिस धमकाने आती है। इसी जमीन से हम जीते-खाते हैं।तेजनारायण राय: जमीन हमारी है और उसका रखवाला व खरीद बिक्री करने वाला आवास बोर्ड कैसे होगा। ऐसा करने पर हम लोग आवास बोर्ड के खिलाफ सड़क पर उतर जाएंगे। शिबोध कुमार : हम छह भाई हैं। सभी खेती पर निर्भर हैं। सरकार को चाहिए कि किसानों की जमीन आवास बोर्ड से मुक्त करा दे। एक तरफ सरकार मकान नहीं तोड़ने की बात कह रही है तो दूसरी तरफ हमारी जमीन को खरीद-बिक्री के लिए आवास बोर्ड के हवाले कर रही है।

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