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लम्बी अवधि के बाद मिला मृत बैल का पैसा देनदारी से

कार्यालय संवाददाता लखनऊबैल के मरने के बाद बीमा कम्पनी से पैसे लेने में पसीने छूट गए। बैल के मालिक की पत्नी को बीमित राशि के लिए तीन वर्ष दौड़ाया गया। पैसा न देने का मन बना चुकी बीमा कम्पनी ने तमाम तरह के पेंच भी फंसाने में कसर नहीं छोड़ी। महिला ने जिला उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दर्ज कराया। जहाँ फोरम ने उसके पक्ष में आदेश सुनाते हुए विपक्षी बीमा कम्पनी को मृतक बैल की बीमा राशि देने का आदेश दिया।मामला लखनऊ के पृथ्वीपुर, पोस्ट अर्जुनपुर के निवासी स्व.भगवानदीन की पत्नी सुनीता का है। सुनीता ने बताया कि उसके पति ने एक बैल जोड़ी आईआरडी योजना के तहत जिला सहकारी बैंक, शाखा बक्शी का तालाब के माध्यम से छह हजार रुपए में क्रय किया था। उनका बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कम्पनी ने मास्टर पॉलिसी के तहत किया था। उसने बताया कि एक बैल बीमार होकर मर गया। उसकी सूचना जिला सहकारी बैंक को दी गई। औपचारिकताएँ पूरी कर विपक्षी बीमा कम्पनी के यहाँ दावा प्रस्तुत किया गया। लेकिन साढ़े तीन साल के बाद बीमा कम्पनी ने उसके दावे को आधारहीन बताकर नो-क्लेम करार दे दिया। विपक्षी बीमा कम्पनी ने पैसा न देने के लिए सुनीता पर मृतक भगवानदीन की पत्नी न होने का आरोप लगाया। सूचना समय पर न देना और प्रीमियम अदायगी जैसे पेंच फंसाए। लेकिन फोरम ने साक्ष्यों की जाँच और अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद बीमा कम्पनी को देनदारी से बचने के लिए अनर्गल आरोप लगाने और बीमा क्लेम खारिज करने का दोषी पाया। सुनीता के पक्ष में जिला उपभोक्ता फोरम द्वितीय के अध्यक्ष एजे सिद्दीकी, सदस्य सीमा भार्गव और वीके गर्ग ने विपक्षी बीमा कम्पनी को मृतक बैल की बीमा राशि 3000 रुपए और मृतक पशु की मृत्यु की तिथि 20.04.98 से बीमा राशि की अदायगी तक नौ प्रतिशत ब्याज देने, तीन हजार रुपए क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपए वाद व्यय भी बीमा कम्पनी को देने का आदेश दिया।

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