DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मधुमक्खियों के छत्ते को जलाना नहीं है कोई हल

सीमा शर्माचंडीगढ़फूलों के परागण और फसलों को बेहतर बनाने में मधुमक्खी की अति महत्वपूर्ण भूमिका है। क्योंकि यदि मधुमक्खियां नहीं होंगी तो दुनिया में भूखमरी फैल सकती है। क्योंकि आधे से अधिक फसलें ही नहीं होंगी। मधुमक्खियों का दंश सिर्फ दर्द ही नहीं, दवा भी देता है। क्योंकि हमें शहद के रूप में औषधि और खाद्यपदार्थ मधुमक्खियों से ही प्राप्त होता है। यदि हम इस चक्र को बनाए रखना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि मधुमक्खियों के जीवन की रक्षा की जाए। क्या कहते हैं कीट वैज्ञानिककेआर चिखतकर कहते हैं कि मधुमक्खियां अपनी ओर से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती हैं। यदि कोई उनके छत्ते को छेड़े तो ही वे एग्रेसिव होती है। इन महीनों में वे नए घर की तलाश में होती हैं। इसी के चलते बीच में कोई आ जाए या फिर उनके छत्ते को छेड़ दिया जाए तो फिर एग्रेसिव होकर डंश देती है। गौर करें तो हमें यह साफ हो जाएगा कि मधुमक्खियां स्वयं मनुष्यों से दूर एकांत में रहना चाहती हैं। इसीलिए वे अपने छत्ते हमेशा आबादी से बहुत दूर, ऊंचाई और पेड़ाें में छिपे होते हैं। शहर में करीब 320 छत्ते हैंसूत्रों के अनुसार शहरभर में करीब 320 के करीब मधुमक्खियों के छत्ते लगे हुए हैं। यह छत्ते अधिकतर इंस्टीट्यूट, रॉक गार्डन के पीछे, पीजीआई या फिर ऊंची बिल्डिम्ग में हैं। मधुमक्खियां हमला करें तो क्यों करेंविशेषज्ञों के अनुसार यदि मधुमक्खियां हमला करें तो भागे नहीं, बल्कि लेट जाएं और पूरे शरीर को कवर करने की कोशिश करें। करीब 10 मिनट तक लेटे रहें और जब लगे कि मधुमक्खियां चली गई हैं तो सबसे पहले अस्पताल जाकर प्रारंभिक उपचार करवाएं।पिछले हफ्ते पीजीआई में जलाए 5 छत्तेपीजीआई के फायर विंग के राजेश कुमार ने बताया कि पिछले शुक्रवार को अस्पताल परिसर में 5 छत्ते जलाए हैं। जबकि सोमवार को एक छत्ता जलाया गया है। विभाग की ओर से अस्पताल में करीब 10 लाइफ गार्ड पीबीसी पहनकर खड़े किया गया है। ताकि यदि कोई मधुमक्खी हमला करती है तो मरीजों को बचाया जा सके।छत्ते जलाना नहीं है कोई हलविशेषज्ञों के अनुसार मधुमक्खियों के हमले से बचने का उपाय छत्ते जलाना नहीं है। कयोंकि छत्ते जलाकर हम फूलों के परागण और फसलों को बेहतर बनाने में मधुमक्खी की अति महत्वपूर्ण भूमिका को समाप्त कर रहे हैं। न केवल फल, फूल बल्कि औषधि के रूप में मिलने वाला शहद भी हमें नहीं मिल पाएगा। क्या कहते हैं डाक्टरजीएमसीएच 32 के जनरल मेडिसन के डॉ. संजय का कहना है कि मधुमक्खियां यदि डंश दें तो अस्पताल जाकर प्रारंभिक उपचार अवश्य ले लेना चाहिए। 5 से 10 मधुमक्खियों के काटने से मरीज को कोई अधिक नुकसान नहीं पहुंचता है, बल्कि 1 सौ तक काटे तो ही मरीज की जान को खतरा होता है। डॉ. संजय कहते हैं कि मधुमक्खी के काटने से ऐनाफाइलोक्सिस रिएक्शन होता है। इससे मरीज की सांस में तकलीफ, ब्लड प्रेशर लो होना व शरीर पर लाल निशान बना देता है। अस्पतालों में हर हफ्ते करीब 2 से 3 लोग मधुमक्खियों के डंशने से पहुंचते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: मधुमक्खियों के छत्ते को जलाना नहीं है कोई हल