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वैध नहीं थी सीबीआई जांच : मिलन बनर्जी

जज के घर पैसा पहुंचाने का मामलापवन शर्माचंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की एक न्यायाधीश के घर 15 लाख रुपये नकद पहुंचाने के मामले में जस्टिस निर्मल यादव के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच को देश के तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी ने अवैध करार दिया था। इस मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर सोमवार को लोकल कोर्ट में सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने 2009 में सीबीआई को जस्टिस यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी ने अपनी छह पृष्ठों की एक रिपोर्ट में सीबीआई जांच की खामियों को गिनाया था जिसके आधार पर केंद्र ने यह फैसला किया। इस मामले ने उस समय न्यायपालिका में हड़कंप मचा दिया था।क्या था मामला : 13 अगस्त, 2008 को हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल के क्लर्क प्रकाश राम ने जस्टिस निर्मलजीत कौर के आवास पर 15 लाख रुपयों का एक बंडल पहुंचाया। जज ने इन रुपयों को लेकर अनभिज्ञता जताते हुए 18 अगस्त को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच में दावा किया कि 15 लाख रुपये जस्टिस निर्मल यादव को दिये जाने थे और गलती से दूसरे जज के घर पहुंच गये।अटॉर्नी जनरल का मत : अगर सीबीआई हाईकोर्ट के किसी वर्तमान जज के आचरण की जांच करना चाहती थी तो यह जरूरी था कि वह इसके लिए जांच शुरू करने से पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनुमति लेती।

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