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चंडीगढ़ से कोई नहीं

चंडीगढ़ से संसद नहीं पहुंची कोई महिला सभी दलों ने उतारे पुरुष उम्मीदवार चंडीगढ़। देश भर में भले ही राजनीतिक दलों में महिला आरक्षण को लेकर सरगर्मी हो लेकिन हर मामले में अव्वल चंडीगढ़ से किसी भी राजनीतिक दल ने महिलाओं को सांसद बनाकर संसद में नहीं भेजा है। जब से चंडीगढ़ का गठन हुआ तब से ही इस संसदीय सीट पर पुरूषों का ही कब्जा रहा है। अभी तक यहां से किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने महिलाओं को टिकट नहीं दी। पहली बार संसदीय सीट के लिए चुनाव 1967 में चुनाव हुआ तो यहां से भारतीय जनसंघ के श्री चंद गोयल जीते। उसके बाद सन 1971 में हुए चुनाव में कांग्रेस के अमर नाथ विद्यालंकार जीते। इसके बाद भारतीय लोकदल से कृ ष्णकांत जीते। 1980 में कांग्रेस के पास यह सीट चली गई। उस समय पार्टी से जगन्नाथ कौशल जीते थे। 1889 में जनता दल से हरमोहन धवन जीते। इसके बाद कांग्रेस ने फिर 1991 बाजी मारी और पहली बार मौजूदा केबिनेट मंत्री पवन कुमार बंसल जीते। लेकिन 1996 में भाजपा के सतपाल जैन विजयी हुए। 1998 में फिर से सतपाल जैन की जीत हुई। लेकिन इस समय मध्यावधि चुनाव हो गए और कांग्रेस के पवन कुमार बंसल ने 1999 में जैन को हरा दिया। इसके बाद सन 2004 मे फिर बंसल जीते और अब पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में भी बंसल ने जैन व धवन को हराकर जीत हासिल की। इन चुनावों में महिलाएं मैदान मेंउतरी तो लेकिन निर्दलीय के तौर पर। इसलिए वे जीत के करीब तक नहीं पहुंच सकी। महिला आरक्षण के बिल से महिलाओं को ताकत मिलेगी। देश और समाज का विकास होगा। कन्या भ्रूण हत्या जैंसी बुराइयों पर भी रोक लगेगी। जहां तक महिलाओं को इस सीट पर टिकट नहीं मिलने का कारण है तो हो सकता है कि महिलाएं इतनी सक्रिय नहीं हो। और वे टिकट के काबिल नहीं रही हों। लेकिन जैसे जैंसे महिलाओं कोऔर मौके मिल रहे हैं वे आगे बढ़ेंगी। -- बीबी बहल अध्यक्ष, चंडीगढ़ कांग्रेस महिलाओं को आरक्षण का मैं पूरी तरह से समर्थन करती हूं क्योंकि राजनीति को ही छोड़कर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे आ रही है. यदि राजनीति में आरक्षण मिलेगा तो वे यहां पर भी बहुत अच्छा काम करेगी। समाज को भी इसका फायदा मिलेगा क्योंकि वे बेहतर तरीके से प्रशासन कर सकती है यह बात साबित हो चुकी है- अनु चतरथ मेयर चंडीगढ़। महिला आरक्षण को लेकर इतना विवाद करने की जरूरत नहीं है।यदि राजनीतिक दलों में इच्छा शक्ति हो तो उन्हें 33 तो क्या 50 फीसदी आरक्षण भी दियाजा सकता है। लेकिन विडंवना जो दल आज महिला आरक्षण बिल का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं उनका ही महिलाओं को टिकट देने में अच्छा रिकार्ड नहीं है। बिल पर राजनीति हो रही है न कि उन्हें आगे लाने के लिए ठोस प्रयास किया जा रहा है: अजय जग्गा अध्यक्ष जनता पार्टी चंडीगढ़। इस बिल के पारित होने के बाद महिलाओं को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। सालों से महिलाओं को उनका हक नहीं मिला था वह उन्हें मिलेगा। इससे उनका सशक्तिकरण होगा तो उन पर होने वाले अत्याचार भी कम होंगे। -- हरमोहन धवन, बसपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री। महिला आरक्षण तो जरूरी है लेकिन महिलाओं ने दिखा दिया है कि बगैर आरक्षण के ही वेकिसी भी मुकाम पर पहुंच सकती है। महिला किसी से कम नहीं है। आज राष्ट्रपति और विपक्ष की नेता महिला हैं। सबसे बड़ी पार्टी की अध्यक्ष महिला हैं। जरूरत उन सभी महिलाओं को आगे लाने की है जो समाज में पीछे रह गई हैं। हरजिंदर कौर पूर्व मेयर।

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