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ये हैं महिला शक्ति की प्रतीक

सीमा शर्मा चंडीगढ़महिला सशक्तिकरण की दिशा में ट्राईसिटी के कुछ स्वंयसेवी संगठन और महिलाएं अहम भूमिका निभा रहे हैं। बात चाहें मिड डे मील का गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने की हो या फिर समाज में शिक्षा की अलख जगाने की हर जगह महिलाएं अपना योगदान दे रही हैं। शिवानंद मैमोरियल इंस्टीटय़ूट : बदला जायकामिड डे मील की योजना को सफल बनाने और कम खर्च में बच्चों को प्रोटीन युक्त भोजन उपलब्ध करवाने का श्रेय स्वामी शिवानंदा मेमोरियल इंस्टीटय़ूट (एनजीओ) को जाता है। चंडीगढ़ में पहली बार किसी ऐसे एनजीओ को मिड डे मील का कार्यभार सौंपा था, जिसमें सभी महिलाएं जरूरतमंद और अशिक्षित थीं। आज यह महिलाएं कंधे से कंधा मिलाते हुए 25 हजार से अधिक बच्चों के लिए मिड डे मील तैयार करती हैं। महिलाओं का यह संगठन न केवल मिड डे मील योजना के अंतर्गत कम खर्च में बढिम्या भोजन, साथ ही बेरोजगार व जरूरत महिलाओं को रोजगार भी मुहैया करा रहा है। इसी के चलते इस बार गणतंत्र दिवस पर इन्हें पुरस्कृत भी किया गया है। एनजीओ के स्थानीय जनरल मैनेजर परमेश्वर ने बताया कि ब्रह्मलखमी सेंटर फॉर वूमेन इंपावरमेंट में 40 महिलाएं कार्य कर रही हैं। यहां 40 महिलाएं स्कूली बच्चों के लिए मिड डे मील तैयार करती हैं। यहां पर कालोनी नंबर 5, जगतपुरा, बुड़ैल व रामदरबार आदि से महिलाएं रोजगार पा रही हैं। आश्रय : नारी शक्ति का प्रतीकआश्रय एक छोटी सी आशा, घरेलू महिलाओं द्वारा शुरू किया गया एनजीओ है। एनजीओ की वाइस प्रेजीडेंट देवी सिरोही व नूतन शुक्ला ने बताया कि एक बार किसी काम से कुम्हार कालोनी गए थे। वहां लड़कियों की हालत देखकर बहुत बुरा लगा। उसके बाद कुछ लोगों के साथ मिलकर अब हम इस कालोनी की लड़कियों व बच्चों को क ख ग से रूबरू करवा रहे हैं, ताकि वे आने वाले समय मैं अन्य लोगों की तरह समाज में खड़े हो सकें। क्योंकि शिक्षा के माध्यम से समाज की तकदीर बदल सकती है। इसके अलावा ग्रुप गरीब व अनाथ लड़कियों की शादी भी करवाता है। ग्रुप के पास इस समय करीब 30 से अधिक लड़कियों शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।डॉ. गुरजीत कौर : स्वस्थ समाज का सपनाजीएमसीएच-32 के जेनेटिक सेंटर की हैड डॉ. गुरजीत कौर महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने के लिए सक्रिय हैं। अब उन्होंने गर्भवती महिलाओं को प्री नेटल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराने के लिए प्रेरित करने का बीड़ा उठाया है। यह सुविधा 1 सौ रुपए में जीएमसीएच 32 में उपलध है। मां के पेट में जब बच्चाा बन रहा होता है तो गुण सूत्र और रीड की हड्डी के डिफेक्ट इन टेस्ट से पता चल जाता है। गुरजीत का कहना है कि महिलाओं को यह टेस्ट 11 से 16 हफ्तों के बीच में करवा लेना चाहिए। क्योंकि जब तक मां और बच्चाा स्वस्थ नहीं होगा, स्वास्थ समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। महिला दिवस पर यह भी संकल्प लें कि गर्भवती महिला को सही समय पर चिकित्सा सुविधाएं दिलवाएंगे। तेजस्वनी शर्मा : हर बच्चाा है खासप्रेजीडेंट अवार्ड व इंदिरा गांधी अवार्ड से सम्मानित तेजस्वनी शर्मा चंडीगढ़ की शान है। तेजस्वनी समाज के साथ उन अभिभावकों के लिए भी मिसाल हैं, जोकि विशेष बच्चों को एक बोझ समझते हैं और उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। यदि परिवार व समाज का सहयोग हो तो हर ऐसा बच्चाा तेजस्वी जैसा परचम लहराकर उनका सिर ऊंचा कर सकता है। वंदना दिसौदिया : टुक-टुक दौड़ाएं महिलाएंस्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की सचिव वंदना दिसौदिया कहती हैं कि जब तक महिलाएं स्वयं अपने अधिकारों के लिए जागरूक नहीं होंगी, तब तक महिला दिवस मनाने का कोई फायदा नहीं है। आज समय बदल रहा है, लेकिन अब महिलाएं कंधे से कंधा मिलाते हुए चल रही हैं। सोसायटी में आज एक अच्छा मुकाम बना लिया है। हम भी महिलाओं को देखते हुए योजना बना रहे हैं कि अब टुक-टुक के बाद महिला टैक्सी ड्राइवर तैयार की जाएं, ताकि महिलाएं आराम से अपना सफर कर सकें। मधु बहल : जगा रही शिक्षा की अलखकेबी डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल मधु बहल न केवल एक प्रिंसिपल की भूमिका निभा रही हैं, बल्कि सीबीएसई की नेशनल काउंसलर भी हैं। शिक्षा की अमूल्य विरासत को समझते हुए क ख ग को यह स्लम एरिया तक भी पहुंचा रही है। मधु ने स्लम एरिया के 350 बच्चों की शिक्षा का प्रबंध अपने स्कूल में किया है। मधु को सीबीएसई की ओर से नेशनल अवार्ड, मानव संशाधन मंत्रालय की ओर से नेशनल अवार्ड के अलावा यूटी शिक्षा विभाग की ओर से स्टेट अवार्ड व वर्ष 2008 में उन्हें पंजाब रत्न अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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